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Home बिहार पूर्णिया सेंट्रल जेल में दो साल से बंद पड़ा है चना सत्तू का उत्पादन

सेंट्रल जेल में दो साल से बंद पड़ा है चना सत्तू का उत्पादन

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सेंट्रल जेल में दो साल से बंद पड़ा है चना सत्तू का उत्पादन

– सरसों तेल पेराई समेत पांच उद्योग है पूरी तरह से बंद – 2019 में तात्कालीन डीएम ने किया था छह उद्योग का उद्घाटन

पूर्णिया. सेंट्रल जेल में उत्पादित चना सत्तू का स्वाद पूर्णिया समेत अन्य जेलों के बंदियों को नसीब नहीं हो रहा है. पिछले दो वर्ष से सेंट्रल जेल में उत्पादित चना सत्तू का उत्पादन बंद है. यही हाल सरसों तेल का है. चार वर्ष पूर्व शुरुआती दौर में सेंट्रल जेल में उत्पादित चना सत्तू और सरसों तेल का स्वाद सूबे के बक्सर के सेंट्रल जेल के बंदी भी चख रहे थे. लेकिन विभागीय ग्रहण लगने से सरसों तेल का उत्पादन तो शुरुआती दौर में ही बंद हो गया अब विगत दो वर्ष चार माह हुए जब चना सत्तू के उत्पादन पर भी ग्रहण लग चुका है. दरअसल, सजायाफ्ता कैदियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से सरकार द्वारा यह कदम उठाये गये थे ताकि सजा काटने के बाद जब वे घर जायें, तो वे अपने हुनर के बल पर अपना खुद का काम कर सके और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके.

चार वर्ष पूर्व शुरू हुआ था उत्पादन

सूबे के जेल आइजी और तात्कालीन पूर्णिया के डीएम की पहल पर चार वर्ष पूर्व सेंट्रल जेल में चना सत्तू और सरसों तेल का उत्पादन शुरू हुआ था. तत्कालीन जेल अधीक्षक जितेन्द्र कुमार ने बताया था कि चना सत्तू और सरसों तेल पेराई के अलावा मशाला, चना भुजा, पावरलूम, फिनाइल एवं कास्टिक का उत्पादन होगा. इन सभी उत्पादित माल की पैकेजिंग की जा रही है. तैयार माल के बिक्री के लिए जेल प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है. तैयार उत्पादों को न केवल पूर्णिया एवं कोसी प्रमंडल के सात जिलों में बल्कि सेंट्रल जेल समेत 9 जेलों में बिक्री करने की योजना है.

16 अगस्त 2019 में हुआ था उद्घाटन

16 अगस्त 2019 को तत्कालीन डीएम प्रदीप कुमार झा ने सेंट्रल जेल में छह उद्योगों का उद्घाटन किया था. उद्योगों को चलाने के लिए जेल के 200 सजायाफ्ता कैदियों को प्रशिक्षण दिया गया था. इनमें 100 कैदियों को उत्पादन के काम में लगाया गया था. इन्हें मानदेय भी दिया जा रहा था. उस समय जेल प्रशासन की ओर से कहा गया था कि निकट भविष्य में तीन उद्योग और स्थापित किये जायेंगे. इसके आवंटन की प्रक्रिया चल रही है. इनमें चूड़ा, साबुन एवं लकड़ी उद्योग शामिल है. इसके बाद जूट बैग एवं ब्रेड का उत्पादन करने की योजना थी. तब तत्कालीन जेल अधीक्षक ने बताया था कि उत्पादित माल रखने के लिए जेल में पर्याप्त जगह है. लेकिन लेकिन कच्चा माल रखने के लिए जगह की फिलहाल कमी है. इसके लिए भवन निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है. छह उद्योगों का उद्घाटन हो गया. इनमें अन्य उद्योग तो नहीं चला लेकिन चना सत्तू और सरसों तेल पेराई का काम चल रहा था, जो अब बंद हो चुका है.

कहते हैं जेल अधीक्षक

सेंट्रल जेल में पुन: उद्योग शुरू करने को लेकर गुरुवार को जेल विभाग के मुख्यालय में एक बैठक आयोजित की गयी है. वे भी इस बैठक में शामिल हो रहे हैं. जल्द ही निर्णय लेकर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि हाल ही में जिला पदाधिकारी द्वारा जेल के निरीक्षण के दौरान उद्योग शुरू करने के संबंध में निर्देश दिया गया था.

मनोज कुमार, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल पूर्णियाफोटो. 16 पूर्णिया 3- मनोज कुमारफोटो. 16 पूर्णिया 2- सेंट्रल जेल पूर्णिया

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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