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Home बिहार पूर्णिया गर्मी व लू से बचाव के लिए सावधानी जरूरी

गर्मी व लू से बचाव के लिए सावधानी जरूरी

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गर्मी व लू से बचाव के लिए सावधानी जरूरी

इस वर्ष जिले में पांच लू से ग्रसित मरीजों का किया गया इलाज पूर्णिया. गर्मी के मौसम में लू लगने की समस्या आम होती है साथ ही बड़ों एवं बच्चों में कई तरह के संक्रमण के साथ डायरिया, पानी में कमी जैसी विभिन्न परेशानियों से ग्रसित होने की संभावना रहती है. तपती गर्मी में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को लू से सुरक्षा के लिए चिकित्सकों के निर्देश का ध्यान रखने की जरूरत है. लू से ग्रसित लोगों को चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिए जिले के सभी अस्पताल में आवश्यक सुविधा उपलब्ध है. लू के लक्षण दिखाई देने पर लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में चिकित्सकों से सम्पर्क करना चाहिए और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए.

गर्म, लाल और सुखी त्वचा का होना लू के हैं लक्षण

बढ़ती गर्मी में गर्म, लाल और सुखी त्वचा का होना, शरीर का तापमान 40°C या 104°F से अधिक होना, चक्कर आना, बेहोशी एवं सर का हल्कापन होना, जी मचलना अथवा उल्टी होना, तेज सिर दर्द का होना, तेज धड़कन या सांसे तेज होना, मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन का होना आदि लू से ग्रसित होने के लक्षण हो सकते हैं. ऐसा होने पर ग्रसित व्यक्ति को तत्काल नजदीकी अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवाओं के साथ साथ लू से सुरक्षित रहने के सावधानी का ध्यान रखना चाहिए. इस वर्ष पूर्णिया जिले में अबतक 05 मरीज लू से ग्रसित पाए गए हैं जिन्हें अस्पताल में जांच के बाद चिकित्सकों द्वारा आवश्यक मेडिसीन उपलब्ध करते हुए लू से सुरक्षा के लिए जागरूक रहने की आवश्यक जानकारी दी गई.

सावधानी ही बचाव का बेहतर उपाय

सिविल सर्जन डॉ ओ पी साहा ने बताया कि लू से ग्रसित मरीजों को बेहतर चिकित्सकीय सहायता प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक प्रयास किया जा रहा है. सभी अस्पतालों में लू से ग्रसित मरीजों के उपचार के लिए सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध है. लू से बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिला और मजदूर व्यक्ति को अत्यधिक प्रभावित होने का खतरा रहता है. ऐसे लोगों को लू से सुरक्षा के लिए बचाव के उपायों का आवश्य उपयोग करना चाहिए. कड़ी धूप में बाहर जाने एवं कठिन परिश्रम करने से ऐसे लोगों को परहेज करना चाहिए. बच्चों को धूप में खेलने-कूदने, टहलने आदि नहीं करना चाहिए. ऐसे मौसम में चाय, कॉफी तथा अन्य गर्म पेय से परहेज करने की जरूरत है. धूप में निकलने से पहले शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने की जरूरत है. घर से निकलने से पहले भरपेट भोजन करना चाहिए. धूप में निकलने पर चश्मा का उपयोग, सिर पर तौलिया/गमछा या छाता रखना चाहिए.

ओआरएस घोल का करना चाहिए उपयोग

सिविल सर्जन डॉ साहा ने बताया कि अचानक लू लगने वाले व्यक्ति को छायादार स्थान पर सही स्थिति में लिटाते हुए उनके तंग कपड़ों को ढीला अथवा हटा देना चाहिए. शरीर को हवा लगने के लिए कूलर, पंखे आदि का उपयोग करना चाहिए. ग्रसित व्यक्ति का पैर को सामान्य से थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए और ठंडे पानी से शरीर को पोंछना चाहिए. इस दौरान रोगी को ओआरएस का घोल/निम्बू पानी/साधारण पानी/नमक-चीनी का घोल पिलाना चाहिए. यदि व्यक्ति पानी की उल्टियां करे या बेहोश हो तो उसे कुछ भी खाने या पीने नहीं देना चाहिए. तत्काल प्राथमिक उपचार करने से ग्रसित व्यक्ति लू से सुरक्षित हो सकते हैं. ऐसा करने पर भी ग्रसित व्यक्ति की तबियत ठीक नहीं होने पर उन्हें तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लाकर चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए.फोटो –13 पूर्णिया 10- सांकेतिक

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