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Home बिहार पूर्णिया बर्न वार्ड में झाड़ियां घुसीं अंदर, मरीजों पर बढ़ा संक्रमण का खतरा

बर्न वार्ड में झाड़ियां घुसीं अंदर, मरीजों पर बढ़ा संक्रमण का खतरा

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बर्न वार्ड में झाड़ियां घुसीं अंदर, मरीजों पर बढ़ा संक्रमण का खतरा

ठंड बढ़ी तो बढ़ा हादसों का सिलसिला, जीएमसीएच बर्न वार्ड में हालात बदतर

पूर्णिया. जिस प्रकार ठंड का असर बढ़ रहा है उसी तरह जीएमसीएच के बर्न वार्ड में गर्म पानी और आग से झुलसे मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है. वर्तमान हालात की अगर बात की जाय तो इस वार्ड में लगे लगभग डेढ़ दर्जन बेड पर फिलहाल उतनी ही संख्या में मरीजों का इलाज चल रहा है. वहीं मरीजों की इलाज से लेकर उनके आवासन एवं भोजन आदि की समुचित व्यवस्था होते हुए भी बर्न वार्ड के अन्दर की हालात चिंताजनक बनी हुई हैं. इस पुराने भवन की दीवारों पर चारो ओर सीलन लगे हुए हैं साथ ही पीछे की दीवारों पर बनी खिड़कियों पर जंगलों और लत्तर वाली झाड़ियों का कब्जा दिखाई दे रहा है इतना ही नहीं कुछ जंगल की लतें वार्ड के अन्दर तक पहुंच गयी हैं. इन सब की वजह से यहां भर्ती मरीजों के लिए संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है. हालांकि वार्ड में मौजूद नर्स एवं गार्ड भर्ती मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए उनके परिजनों से स्वच्छता अपनाने और जूते चप्पल वार्ड के बाहर ही रखने को कहते हैं. वहीं अधिकारी स्वच्छता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता बार बार दोहराते नजर आते हैं जबकि वार्ड के अंदर झाड़ की उपस्थिति इस मामले में खुद एक बड़ा सवाल है.

जरा सी असावधानी से झुलसते हैं लोग

जाड़े में ठंड से बचाव का सबसे सरल साधन होने की वजह से घूर जलाने की परम्परा वर्षों से चली आ रही है वहीं स्नान आदि के लिए पानी गर्म करना सामान्य बात है जबकि गांवों में भोजन पकाने के क्रम में आज भी अनेक घरों में लकड़ी चूल्हे का भी इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में ज़रा सी असावधानी से लोग झुलस जाते हैं. जीएमसीएच के बर्न वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों में परोरा के उद्भव, आदमपुर की पूनम देवी और अररिया के मुर्तजा ने बताया कि थोड़ी सी असावधानी की वजह से उनके यहां इस तरह की घटना घटित हो गयी. उन्होंने यह भी बताया कि यहां सभी मरीजों का बेहतर इलाज चल रहा है.

कहते हैं चिकित्सक

जाड़े में ठंड की वजह से कपड़ों में आग लगने का शुरूआती आभास नहीं होता है और जब आग ज्यादा पकड़ लेती है तब लोगों के ध्यान में ये बात आती है जो बेहद ही खतरनाक है. इस तरह के मामलों में शरीर पर ज्यादा कपड़ों की वजह से झुलसने का प्रतिशत बेहद बढ़ जाता है जिससे शरीर के अन्दर के अंगों के क्षतिग्रस्त हो जाने का खतरा रहता है. ऐसे मरीज ऊपर से देखने पर ज्यादा घायल नहीं मालूम देते किन्तु अंदरूनी अंगों के क्षतिग्रस्त होने की बात धीरे धीरे सामने आती है. जिसमें कई बार मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है. जबकि उपरी घाव को भरने में महीनों लग सकते हैं. इसलिए ऐसे मरीजों को किसी भी तरह के संक्रमण से बचाना बेहद जरुरी है.

बोले अधीक्षक

पहले से चल रहे मदर केयर कंगारू यूनिट की खाली जगह को बर्न वार्ड एवं थैलेसीमिया डे केयर सेंटर के रूप में व्यवस्थित कर दिया गया है और सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं. पूरे जीएमसीएच में हमेशा साफ़ सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है. समय समय पर चारो ओर की सफाई कराई जाती है और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए बेहतर उपचार की व्यवस्था का हमेशा प्रयास रखा जाता है.

डॉ. संजय कुमार, अधीक्षक जीएमसीएच

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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