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Home बिहार पूर्णिया समारोह में बज्जिका गीतों में जनचेतना व नींद नहीं आती पुस्तक का लोकार्पण

समारोह में बज्जिका गीतों में जनचेतना व नींद नहीं आती पुस्तक का लोकार्पण

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समारोह में  बज्जिका गीतों में जनचेतना व नींद नहीं आती पुस्तक का लोकार्पण

पूर्णिया. साहित्यकार डॉ रामनरेश भक्त की कृति बज्जिका गीतों में जनचेतना एवं नींद नहीं आती (कविता-संग्रह) का लोकार्पण प्रशिक्षण केन्द्र भारत स्काउट और गाइड के प्रशाल में संपन्न हुआ. लोकार्पण समारोह का आयोजन साहित्यांगन, बुजुर्ग समाज एवं चटकधान के संयुक्त बैनर तले किया गया. समारोह दो सत्रों में मनाया गया. प्रथम सत्र में पुस्तक लोकार्पण एवं उसके पश्चात दोनों कृतियों पर विद्वानों के द्वारा समीक्षात्मक परिचर्चा की गयी. परिचर्या में वरिष्ठ कवि, कथाकार एवं नाटककार प्रो देवनारायण पासवान देव, डॉ.मुहम्मद कमाल,प्रो.शंभू लाल वर्मा, डॉ.शिवमुनि यादव, कवि मदन मोहन मर्मज्ञ, डॉ.केकेचौधरी, रीता सिन्हा आदि ने भाग लिया. अपने विचार साझा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शोधकृति बज्जिका गीतों में जन-चेतना बज्जिका के पारंपरिक गीत एवं जनचेतना संपन्न आधुनिक कलागीतो का ऐसा अलबम है जिसमें किसान-मजदूर एवं तमाम श्रमजीवियों की प्रगतिकामी चेतना मुखरित है. इसमें बज्जिकांचल की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक चेतना का विवेचन भी वैदुष्यपूर्ण ढंग से किया गया है. प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो देवनारायण पासवान देव ने की तथा संचालन सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कविगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता आकाशवाणी पूर्णिया के पूर्व निदेशक विजय नंदन प्रसाद ने की. गोष्ठी का संचालन डॉ केके चौधरी ने किया. मौके पर प्रो देवनारायण पासवान देव, विजय नंदन प्रसाद, गोपाल चंद्र घोष मंगलम, डॉ.केके चौधरी, बाबा वैद्यनाथ, श्यामलाल पासवान, मिथिलेश राय, अनंत लाल यादव, दिव्या त्रिवेदी, सुनील समदर्शी, रणजीत तिवारी, गिरीश प्र.सिंह, महेश विद्रोही, गोविन्द कु दास, एके चांद, स्नेह किरण, सुमन कुमार आदि कवियों ने अपनी कविताएं सुनायी. कार्यक्रम का संयोजन एवं सामयिक स्थानिक व्यवस्था दिवाकर कुमार एवं स्काउट परिवार ने की. फोटो. 27 पूर्णिया 7- पुस्तक लोकार्पण के मौके पर उपस्थित साहित्यकार एवं अन्य

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