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Home बिहार पूर्णिया विविधतापूर्ण आहार से ही मिल सकती है एनीमिया से छुटकारा

विविधतापूर्ण आहार से ही मिल सकती है एनीमिया से छुटकारा

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विविधतापूर्ण आहार से ही मिल सकती है एनीमिया से छुटकारा

बच्चों में गंभीर कुपोषण का सामुदायिक प्रबंधन कार्यक्रम की जिलास्तरीय समीक्षा

पूर्णिया. जिले के एक निजी होटल में जिलास्तरीय समीक्षा बैठक में एनीमिया मुक्त भारत और सामुदायिक आधारित कुपोषण प्रबंधन (सी-मैम) कार्यक्रम की प्रगति पर व्यापक चर्चा हुई. इस बैठक का उद्देश्य एनीमिया और कुपोषण की मौजूदा स्थिति का आकलन करना, समाधान की रणनीतियां तैयार करना और कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देना था. यूनिसेफ, एम्स पटना और जिला स्वास्थ्य विभाग, पूर्णिया के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस बैठक में समेकित बाल विकास सेवा परियोजना (आइसीडीएस), पंचायती राज विभाग और अन्य विभागों के प्रतिनिधियों सहित जिले में कार्यरत अन्य सहयोगी संस्थाओं और क्षेत्रीय स्वास्थ्य कर्मियों ने भाग लिया. बैठक में कुपोषण और एनीमिया के स्तर में सुधारने के लिए जीवनचक्र दृष्टिकोण को अपनाने पर जोर दिया गया. बैठक का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कानोजिया ने किया. उन्होंने एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं को हल करने के लिए विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया और इन कार्यक्रमों में यूनिसेफ द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की सराहना की. डॉ संजय पाण्डेय, एम्स पटना, डॉ अंतर्यामी दास, पोषण विशेषज्ञ, यूनिसेफ, डॉ सिद्यार्थ रेड्डी, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से बताया कि एनीमिया और कुपोषण का प्रभाव केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे समाज की प्रगति को बाधित करता है. बेहतर पोषण के बिना, न केवल मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बढ़ती है, बल्कि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी बाधित होता है. उन्होंने बताया कि समुचित पोषण, जैसे कि आयरन-फोलिक एसिड की पूर्ति, आयरन सुक्रोज का उपयोग और बच्चों में विविधतापूर्ण आहार को बढ़ावा देकर ही इस समस्या का समाधान किया जा सकता है. यूनिसेफ की पोषण पदाधिकारी डॉ. शिवानी दर और डॉ. संदीप घोष ने जिला स्तर पर एनीमिया और कुपोषण के सामुदायिक प्रबंधन से संबंधित मौजूदा चुनौतियों और रणनीतियों को साझा किया.

कार्ययोजना और निष्कर्ष

बैठक के दौरान पोषण और एनीमिया सुधारने के लिए जीवनचक्र दृष्टिकोण अपनाने पर सहमति बनी. जिले में पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के सुझाव दिए गये. बैठक का समापन इस दृष्टिकोण के साथ हुआ कि एनीमिया मुक्त भारत और कुपोषण का सामुदायिक प्रबंधन कार्यक्रम को एक समन्वित और परिणाम-उन्मुख तरीके से लागू किया जाएगा.

बैठक में ठोस कार्य योजनाए़ं बनायी गयी

-प्रखंडवार गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं का उचित प्रबंधन

– जिले के चिन्हित अस्पतालों में आयरन सुक्रोज की उपलब्धता सुनिश्चित करने- गंभीर तीव्र कुपोषित (सैम) बच्चों की पहचान और उनके लिए सामुदायिक प्रबंधन सेवाओं को सुदृढ़ करना

…………फोटो-21 पूर्णिया 12- बैठक में उपस्थित सिविल सर्जन एवं अन्य.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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