जमीन से निकला था यह शिवलिंग, पूर्णिया के इस शिवाला में मन्नत पूरी होने की है मान्यता
Aaj Ka Darshan: पूर्णिया शहर के बीचोंबीच स्थित एक ऐसा शिवालय, जहां हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गयी प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती. यही कारण है कि महाशिवरात्रि और नागपंचमी के मौके पर न सिर्फ पूर्णिया और कोसी क्षेत्र, बल्कि नेपाल से भी श्रद्धालु यहां मत्था टेकने पहुंचते हैं.
पूर्णिया से अखिलेश चन्द्रा की रिपोर्ट
Aaj Ka Darshan: पूर्णिया के रामबाग और पूर्णिया सिटी के बीच महामाया मंदिर परिसर में स्थित शिवाला शहरवासियों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है. विशाल शिवलिंग वाले इस मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां भगवान शिव सच्चे मन से की गयी प्रार्थना अवश्य सुनते हैं. यही वजह है कि सालों से यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
खेत की खुदाई के दौरान मिला था शिवलिंग, फिर शुरू हुई आस्था की यात्रा
स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि वर्षों पहले रामबाग और पूर्णिया सिटी के बीच स्थित एक खेत में खेती के दौरान जमीन के नीचे यह शिवलिंग मिला था. शिवलिंग मिलने की खबर फैलते ही इलाके के लोगों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बन गया.
बाद में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ इस शिवलिंग की प्रतिष्ठा की गयी. समय बीतने के साथ मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया और लोगों की आस्था लगातार बढ़ती चली गयी. आज यह शिवाला पूर्णिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार किया जाता है.
मन्नत पूरी होने की मान्यता खींच लाती है श्रद्धालुओं को
इस शिवालय को लेकर भक्तों के बीच गहरी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान शिव भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं. कई श्रद्धालु अपनी मुराद पूरी होने के बाद दोबारा मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना भी कराते हैं.
स्थानीय लोगों का यह भी मानना है कि इस शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक से महादेव भक्तों के कष्ट और रोगों का निवारण करते हैं. यही विश्वास लोगों को हर दिन यहां खींच लाता है.
Aaj Ka Darshan: नेपाल से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु, महाशिवरात्रि पर लगता है मेला
महाशिवरात्रि और नागपंचमी के अवसर पर इस मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है. इन पर्वों पर पूर्णिया, कोसी क्षेत्र और सीमावर्ती नेपाल से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
श्रद्धालु जलाभिषेक कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. इन अवसरों पर मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन जाता है.
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तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त ने कराया था मंदिर निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और धार्मिक महत्व को देखते हुए तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त मनोरंजन प्रसाद ने मंदिर निर्माण का कार्य कराया था. बाद के वर्षों में मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण भी किया गया.
मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती हैं, जिससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.
आस्था के साथ सांस्कृतिक पहचान भी है यह शिवाला
रामबाग स्थित यह शिवाला सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि पूर्णिया की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. वर्षों से यह मंदिर लोगों की आस्था, विश्वास और सामाजिक एकता का प्रतीक बना हुआ है.
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