अररिया से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट.
Phanishwar Nath Renu Biopic: हिंदी साहित्य के महान कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन पर आधारित फिल्म ‘रेणु’ का निर्माण जल्द शुरू होने जा रहा है. उगना इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म का उद्देश्य केवल एक साहित्यकार की जीवनी दिखाना नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा, संघर्ष और भारतीय ग्रामीण समाज की उस आत्मा को बड़े पर्दे पर उतारना है, जिसे रेणु ने अपनी रचनाओं में जीवंत किया था. फिल्म की टैगलाइन ‘मैंने लाखों के बोल सहे’ रखी गई है और इसे अगले वर्ष मार्च में रिलीज करने की तैयारी है.
क्यों खास है ‘रेणु’ पर बनने वाली यह फिल्म?
फणीश्वरनाथ रेणु केवल एक लेखक नहीं थे. उन्होंने गांव, खेत, किसान, लोक संस्कृति और आम लोगों की जिंदगी को हिंदी साहित्य में नई पहचान दिलाई. उनकी रचनाओं में बिहार की मिट्टी की खुशबू और समाज की वास्तविक तस्वीर दिखाई देती है.
फिल्म के जरिए नई पीढ़ी को रेणु के व्यक्तित्व और उनके साहित्य से जोड़ने की कोशिश की जाएगी. साथ ही यह दिखाया जाएगा कि कैसे एक लेखक ने अपने लेखन से समाज और राजनीति दोनों को प्रभावित किया.
सांसद प्रदीप कुमार सिंह बोले- यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट
अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने फिल्म को अपना ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बताते हुए कहा कि रेणु की वजह से अररिया की पहचान देश-दुनिया तक पहुंची है. उनका मानना है कि इस फिल्म के माध्यम से देशभर के लोग रेणु के जीवन, उनके संघर्ष और उनके साहित्य को और करीब से जान सकेंगे.

उन्होंने कहा कि रेणु ने गांव और आम लोगों की कहानियों को साहित्य के केंद्र में लाकर नई दिशा दी. फिल्म बनने से स्थानीय कलाकारों और कला-संस्कृति से जुड़े युवाओं को भी मंच मिलेगा.
सिर्फ लेखक नहीं, आंदोलन की आवाज भी थे रेणु
फिल्म से जुड़ी राया सिन्हा ने बताया कि रेणु केवल साहित्य तक सीमित नहीं थे. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में भ्रष्टाचार के खिलाफ चले जेपी आंदोलन से भी जुड़े.
उनका कहना है कि रेणु को समझना है तो केवल उनकी किताबें पढ़ना काफी नहीं, बल्कि उनके गांव और उस परिवेश को भी महसूस करना होगा, जहां से उनकी कहानियां जन्म लेती हैं. फिल्म उसी जीवन दर्शन को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करेगी.
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Phanishwar Nath Renu Biopic: लंबी रिसर्च के बाद तैयार हुई कहानी
राया सिन्हा ने बताया कि फिल्म की पटकथा तैयार करने से पहले कई महीनों तक गहन अध्ययन और शोध किया गया. उन्होंने बताया कि उनके पिता अजीत सिन्हा पटना विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे हैं और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कई डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं.
करीब ढाई घंटे की इस फिल्म के लिए पिछले छह से सात महीनों से लगातार रिसर्च की जा रही है ताकि रेणु के जीवन को प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत किया जा सके.
रेणु पर दुनिया रिसर्च करती है, लेकिन अपने लोग अब भी कम जानते हैं
फिल्म से जुड़े कलाकार फुल कुमार सिंह ने बताया कि वे पिछले ढाई वर्षों से रेणु के जीवन और साहित्य पर अध्ययन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जापान, चीन और इंग्लैंड जैसे देशों से शोधकर्ता रेणु पर अध्ययन करने आते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि अपने ही क्षेत्र के कई लोग उनके योगदान से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. उनका मानना है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता का माध्यम बनेगी.
अररिया और सीमांचल को भी मिलेगा नया सांस्कृतिक मंच
फिल्म निर्माण का एक बड़ा उद्देश्य सीमांचल की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना भी है. स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवा प्रतिभाओं को इससे अवसर मिलने की उम्मीद है.
यदि फिल्म सफल रहती है तो यह न केवल रेणु की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी, बल्कि अररिया और आसपास के क्षेत्र को सांस्कृतिक पर्यटन और रचनात्मक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में भी पहचान दिला सकती है.
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