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दो बंगलादेशी को सात-सात वर्ष की कठोर कैद

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दो बंगलादेशी को सात-सात वर्ष की कठोर कैद

आतंकवादी संगठन जमायतुल मुजाहिदीन और आइएसआइ के थे सक्रिय सदस्य न्यायालय संवाददाता, पटना आतंकवाद निरोधक दस्ता एटीएस की पटना स्थित विशेष अदालत ने पहले मुकदमे में फर्जी दस्तावेजों के साथ पकड़े गये दो विदेशी नागरिकों को शुक्रवार को सात-सात वर्षों के सश्रम कारावास के साथ छह-छह हजार रुपये का जुर्माने की भी सजा सुनायी. आतंकवाद निरोधक दस्ता एटीएस की विशेष अदालत के न्यायाधीश अभिजीत कुमार ने मामले में सुनवाई के बाद यह सजा सुनायी है. जुुुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर दोषियों को एक माह के कारावास की सजा अलग से भुगतनी होगी. इससे पूर्व अपने वकील गणेश तिवारी के माध्यम से अदालत में एक आवेदन दाखिल कर इस मामले के आरोपी खैरुल मंडल और अबू सुल्तान ने अपना गुनाह स्वेच्छा से कबूल किए जाने की बात कही थी. अदालत ने दोनों का बयान लेने के बाद उनका कबूल नामा स्वीकार करते हुए उन्हें भारतीय दंड विधान , विधि विरुद्ध क्रियाकलाप अधिनियम एवं फॉरेन एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया था. इस मामले में अभियोजन की ओर से अभियोजन पदाधिकारी ज्ञान सागर एवं अपर लोक अभियोजक आनंद कुमार सिंह बहस की थी. गौरतलब है कि 24 मार्च 2019 को बिहार के आतंकवादी निरोधक दस्ता थाना की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर पटना जंक्शन के मुसाफिरखाना में छापेमारी कर तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने इन तीनों के पास से भारतीय नागरिकता की पहचान के फर्जी दस्तावेज बरामद किये थे. पूछताछ और जांच में पता चला कि तीनों व्यक्ति बांग्लादेश के नागरिक हैं और वहीं के खुलना क्षेत्र के निवासी हैं. जांच में यह भी पता चला था कि तीनों आरोपी बांग्लादेश के आतंकवादी संगठन जमायतुल मुजाहिदीन तथा आईएसआई के सक्रिय सदस्य थे और वहां की सरकार को गिराना चाहते थे. वहां गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान छुपा कर भारत आ गये थे और यहां भी जमायतुल मुजाहिदीन जैसी संस्थाओं को स्थापित करना चाहते थे. एटीएस थाने में इस मामले की प्राथमिकी एटीएस थाना कांड संख्या 01/ 2019 के रूप में दर्ज की गयी थी. गिरफ्तारी के बाद से तीनों अभियुक्त लगातार जेल में बंद हैं. तीनों अभियुक्तों के खिलाफ विशेष अदालत में सुनवाई जारी थी और अभियोजन इस मामले में अभी तक अपने 18 गवाहों का बयान अदालत में कलम बंद करवा चुकी है. उपरोक्त दोनों आरोपियों के गुनाह कबूल किए जाने के बाद अब मामले के तीसरे आरोपी शरीयत मंडल के खिलाफ सुनवाई जारी रहेगी.

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