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लॉकडाउन में अस्पतालों में परेशानी, बीपी व शुगर चेक कराये बिना लौट रहे मरीज

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लॉकडाउन में अस्पतालों में परेशानी, बीपी व शुगर चेक कराये बिना लौट रहे मरीज
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पटना : करीब 52 दिन से चल रहे लॉकडाउन ने मधुमेह व ब्लड प्रेशर के रोगियों की सेहत बिगाड़ दी है. वहीं, शहर के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में ब्लड प्रेशर व शूगर की जांच भी समय पर नहीं हो पा रही है. यही हाल टांके कटवाने वाले मरीजों का भी है. मरीजों को मायूस होकर अस्पतालों से लौटना पड़ा रहा है. ऐसे मामले शहर के पीएमसीएच, गार्डिनर रोड अस्पताल, आइजीआइएमएस व राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल में देखने को मिल रहे हैं. मरीजों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के डर से कुछ स्वास्थ्य कर्मचारी व डॉक्टर मरीजों का ट्रीटमेंट करने से डर रहे हैं.

दूर से ही देख कर बोले-ठीक है बीपीपीएंडटी कॉलोनी के रहने वाले संजय कुमार की मां की अचानक तबीयत खराब होने के बाद परिजन उन्हें पास के गार्डिनर रोड अस्पताल में लेकर गये. उनकी बूढ़ी मां की सांस अचानक फूलने लगी थी. जैसे ही वह अस्पताल में गये, डॉक्टर ने नर्स को बीपी जांच करने के लिए कहा. लेकिन नर्स कतराने लगी. इसके बाद डॉक्टर ने बिना बीपी जांच के दवा लिखने की कोशिश की. इस पर नाराज परिजन आक्रोशित हो गये और पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करने लगे.

कंट्रोल रूम को फोन करते देख नर्स ने तुरंत बीपी जांच किया. इसी तरह बोरिंग रोड के रहने वाले राजीव प्रसाद की अचानक तबीयत खराब हो गयी. बदन व जोड़ों में तेज दर्द के बाद परिजन राजवंशी नगर हड्डी अस्पताल लेकर गये. वहां भी डॉक्टरों ने बीपी व शूगर जांच कराने की बात कही. राजीव का कहना था कि एक भी कर्मचारी बीपी जांच करने के लिए तैयार नहीं हुआ. हालांकि बाद में निदेशक की फटकार के बाद मरीज की जांच की गयी.

टांके कटवाने के लिए दौड़ती रही पीड़ितामंदिरी में किराये के मकान में रहने वाली कंचन कुमारी के पति रिक्शा चालक हैं. पड़ोसियों से विवाद होने के बाद उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया. पीएमसीएच में ही टांके लगाये गये. लेकिन जब टांके काटने की नौबत आयी, तो मरीज का टांका नहीं काटा गया. कंचन ने बताया कि वह दो दिन तक इमजरेंसी वार्ड में दौड़ती रही, जिसके बाद वह अधीक्षक कार्यालय गयी, अधीक्षक के कहने पर डॉक्टर ने टांका काटा. इस तरह की परेशानी आइजीआइएमएस व एम्स में भी देखने को मिल रही है. वहीं, मरीज का समय पर टांका नहीं काटने को लेकर जब पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ विमल कारक के मोबाइल फोन पर कॉल कर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गयी, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया.

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