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Home बिहार पटना Assi 2026: OTT पर भी नहीं दिखेंगी अच्छी फिल्में! Taapsee Pannu ने कहा- थियेटर में सपोर्ट नहीं मिला तो खत्म हो जाएगा संजीदा सिनेमा

Assi 2026: OTT पर भी नहीं दिखेंगी अच्छी फिल्में! Taapsee Pannu ने कहा- थियेटर में सपोर्ट नहीं मिला तो खत्म हो जाएगा संजीदा सिनेमा

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Assi 2026: OTT पर भी नहीं दिखेंगी अच्छी फिल्में! Taapsee Pannu ने कहा- थियेटर में सपोर्ट नहीं मिला तो खत्म हो जाएगा संजीदा सिनेमा


Assi 2026:
बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) अपनी आगामी फिल्म अस्सी के प्रमोशन के सिलसिले में सोमवार को पटना पहुंचीं. प्रभात खबर से विशेष बातचीत के दौरान तापसी ने अपनी फिल्म, देश में बढ़ते अपराध, पितृसत्तात्मक सोच व फिल्म इंडस्ट्री की चुनौतियों पर खुलकर बात की. पिंक और थप्पड़ जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाने वाली तापसी ने समाज में औरतों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज 10 साल का बच्चा भी अपराध की दिशा में जा रहा है. यह दर्शाता है कि हमारी परवरिश में कहीं न कहीं कमी रह गई है. उन्होंने कहा कि लड़कियां खुद को अपनी प्राथमिकता बनाएं, क्योंकि कोई और उन्हें आगे बढ़ाने नहीं आएगा.

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Q. आपने पहले भी वकालत से जुड़े किरदार निभाए हैं, इस बार ‘अस्सी’ में कोर्ट रूम का अनुभव कैसा रहा?
– मैंने वकील का किरदार पहले सिर्फ एक बार निभाया है, हालांकि कोर्ट के चक्कर कई फिल्मों में लगाए हैं. अस्सी के लिए मैंने पटियाला हाउस कोर्ट जाकर पूरा दिन बिताया. वहां मैंने देखा कि हकीकत फिल्मों से कितनी अलग है. वहां किसी को किसी की परवाह नहीं है, बस एक मामला खत्म होता है और दूसरा शुरू हो जाता है. हमने इस फिल्म में कोर्ट रूम को उतना ही असली दिखाने की कोशिश की है जैसा वास्तव में हमारे देश में होता है.

Q. आपने फिल्मों में अक्सर पितृसत्ता को चुनौती दी है, क्या यह आपकी कोई सोची-समझी जिम्मेदारी है?
– यह सिर्फ मर्द जात की समस्या नहीं है, औरतें भी पितृसत्ता की शिकार हैं. मैंने खुद दिल्ली में रहते हुए छोटे-बड़े पैमाने पर शोषण और हैरेसमेंट देखा है. पिंक के समय मुझे अहसास नहीं था कि यह कितनी रिस्की फिल्म होगी, लेकिन जब वह सफल हुई तो समझ आया कि जनता ऐसी कहानियों से जुड़ती है. मैं समाज की इसी धारणा को बदलना चाहती हूं.

Q. आप एक आउटसाइडर और इंजीनियर रही हैं, सुशांत सिंह राजपूत भी इसी पृष्ठभूमि से थे, उनके बारे में क्या कहेंगी?
– दुर्भाग्य से मुझे उनके साथ ज्यादा समय बिताने का मौका नहीं मिला. हमारा सामाजिक दायरा अलग था. अवार्ड फंक्शन्स में बस एक औपचारिक ‘हाय-हेलो’ ही हो पाती थी. मेरा इंडस्ट्री के सोशल सर्कल में आना-जाना बहुत कम रहता है.

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Q. अनुभव सिन्हा के साथ काम करते हुए क्या आप सेट पर अपने सुझाव भी देती हैं?
– हां, बिल्कुल. अनुभव सर की फिल्मों में कलाकार का व्यक्तिगत योगदान बहुत होता है. जब फिल्म के विचार आपके अंदर से आते हैं, तो वे दर्शकों तक ज्यादा गहराई से पहुंचते हैं. हम चर्चा करते हैं और कई चीजें सुधार के साथ बेहतर निकलकर आती हैं.

Q. ओटीटी और सिनेमाघरों के बीच चल रहे द्वंद्व पर आपकी क्या राय है?
– मैं यह कड़वी हकीकत ऑडियंस के सामने रखना चाहती हूं. अब ओटीटी का नियम है कि जो फिल्म थिएटर में चलेगी, वही वे खरीदेंगे. अगर दर्शक इस तरह के संजीदा सिनेमा को थिएटर में सपोर्ट नहीं करेंगे, तो ये फिल्में बननी बंद हो जाएंगी. फिर हर शुक्रवार सिर्फ लार्जरदैन लाइफ एक्शन फिल्में ही मिलेंगी. अगर आपको अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियां चाहिए, तो थिएटर जाकर इन्हें देखना होगा.

Q. आप निजी जिंदगी में बहुत खुशमिजाज दिखती हैं, आपकी इस सकारात्मकता का राज क्या है?
– मेरी फिल्मों से परे भी एक जिंदगी है. मुझे असफलता से डर नहीं लगता क्योंकि मुझे पता है कि अगर मैं कोई काम एक बार कर सकती हूं, तो दोबारा भी कर सकती हूं. किसी एक चीज के असफल होने से मेरी जिंदगी खत्म नहीं हो जाएगी. यही आत्मविश्वास मेरी खुशी की वजह है.

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Q. आज के युवाओं के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी, जो करियर को लेकर तनाव में रहते हैं?
– आज का युवा बहुत स्मार्ट है, लेकिन वह विकल्पों के बीच उलझा हुआ है. हमारे समय में विकल्प कम थे, इसलिए डर ज्यादा था. आज अवसर बहुत हैं, बस कमी शोध और प्रयास की है. युवा थोड़े आलसी हो गए हैं. मैं यही कहूंगी कि हिम्मत रखो और मेहनत करो, अवसरों की कोई कमी नहीं है.

Q. किरदार निभाने के लिए कलाकारों को विशेष बोली सीखनी पड़ी?
– कहानी वास्तव में दिल्ली की है. दिल्ली एक ऐसा शहर है जहां हर प्रदेश के लोग रहते हैं. फिल्म में हमारी सह कलाकार कनी मलयाली हैं, तो निर्देशक अनुभव सिन्हा ने उनकी बोली को बदला नहीं. उन्होंने कहा कि तुम अपने ही लहजे में हिंदी बोलो. हमने असलियत को बरकरार रखने के लिए डबिंग में भी उसे नहीं छेड़ा.

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ओटीटी पर भी मसाला फिल्मों को मिल रही तरजीह

तापसी पन्नू ने ओटीटी(OTT) की कड़वी सच्चाई उजागर करते हुए कहा कि अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स भी गंभीर और जड़ों से जुड़ी कहानियों वाली फिल्में खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.ओटीटी का पूरा ध्यान अब थिएटर्स के मसाला फिल्म देखने वाले दर्शकों को अपनी ओर खींचने पर है. वे स्पष्ट निर्देश दे रहे हैं कि केवल वही फिल्में खरीदी जाएंगी जो सिनेमाघरों में सफल होंगी. अगर दर्शकों ने थियेटर जाकर अच्छी फिल्मों को सपोर्ट नहीं किया, तो इस तरह का सिनेमा जल्द ही विलुप्त हो जाएगा.

बिहार की पृष्ठभूमि पर फिल्म बनाएंगे अनुभव सिन्हा

फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही बिहार की पृष्ठभूमि पर आधारित एक नयी फिल्म लेकर आ सकते हैं. बिहार में शूटिंग को लेकर उनकी योजनाएं काफी गंभीर हैं और उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी फिल्म अस्सी के प्रोमोशन के दौरान कहा. उन्होंने कहा कि जब कोई विषय उन्हें भावनात्मक रूप से झकझोरता है और साल-डेढ़ साल तक परेशान करता है, तभी वे उस पर काम करते हैं. उनके अनुसार, वे कहानी ढूंढते नहीं हैं, बल्कि कहानी उन्हें खुद ढूंढ लेती है. अभिनेत्री भी बिहार से जुड़ी कहानियों में काम करने की इच्छुक हैं.

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