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सैरातों की समय पर बंदोबस्ती के लिए बढ़ेगी सख्ती

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सैरातों की समय पर बंदोबस्ती के लिए बढ़ेगी सख्ती

राज्य में करीब 11 हजार सैरात हैं, सौ फीसदी राजस्व प्राप्त करने के मकसद से अब सख्ती बढ़ेगी पटना.राज्य में सैरात बंदोबस्ती के अंतर्गत आने वाले मेला, स्थानीय हाट-बाजार, जलकर आदि से समय पर सौ फीसदी राजस्व प्राप्त करने के मकसद से अब सख्ती बढ़ेगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त और डीएम से इसके लिए तय तिथि से दो महीना पहले संबंधित कागजात मांगा है. साथ ही इसमें विलंब करने वाले दोषी पदाधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. फिलहाल राज्य में करीब 11 हजार सैरात हैं. सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार के राजस्व वसूली के महत्वपूर्ण स्रोतों में सैरात बंदोबस्ती शामिल है. इससे अनुमानित सालाना राजस्व करीब पांच सौ करोड़ है, लेकिन कई तकनीकी कारणों से करीब तीन सौ करोड़ रुपये ही वसूली हो पाती है. कम राजस्व वसूली का एक मुख्य कारण सैरात बंदोबस्ती की मंजूरी के लिए देरी से कागजात का आना भी है. ऐसे में कई सैरातों की समय पर बंदोबस्ती नहीं होने से राजस्व वसूली नहीं हो पाती है. 20 लाख से अधिक राजस्व वाले सैरातों की वसूली विभाग के माध्यम से होती है. इससे कम की वसूली डीएम के माध्यम से होती है. इसके साथ ही अधिकतर जलकर की बंदोबस्ती का अधिकार पशुपालन एवं मत्स्य विभाग को दिया गया है. एक साल के लिए होती है बंदोबस्ती राज्य में सैरात बंदोबस्ती एक साल के लिए होती है, लेकिन अलग-अलग सैरातों की बंदोबस्ती के लिए अप्रैल और अक्तूबर महीना तय किया गया है. विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्तों और डीएम को पत्र लिखकर कहा है कि अप्रैल महीने की बंदोबस्ती वाले सैरातों का कागजात हर हाल में फरवरी तक विभाग को प्राप्त हो जाए जिससे समय रहते इसकी मंजूरी दी जा सके. इसी तरह अक्तूबर में बंदोबस्ती वाले सैरातों का कागजात भी अगस्त तक मांगा गया है. लोकसभा चुनाव से बंदोबस्ती में देरी पर अनुपातिक राजस्व का निर्देश लोकसभा चुनाव के कारण अप्रैल में बंदोबस्त होने वाले कुछ सैरातों की बंदोबस्ती नहीं होने की जानकारी विभाग को मिली थी. ऐसे सैरातों के बारे में विभाग ने सभी डीएम को निर्देश दिया है कि पहले के वर्ष की बंदोबस्ती के आधार पर अनुपातिक विभागीय वसूली की जाये. इसके लिए संबंधित अंचल अधिकारी और राजस्व कर्मचारी को जिम्मेदारी दी जाये जिससे पहले की तुलना में कम राजस्व की वसूली नहीं हो.

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