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तिब्बत मुक्ति साधना और भारत-चीन संबंध पर सेमिनार

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तिब्बत मुक्ति साधना और भारत-चीन संबंध पर सेमिनार

दलाई लामा को बिहार विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने को बुलाने की मांग

– तिब्बत मुक्ति साधना और भारत-चीन संबंध के दो दिवसीय सेमिनार का समापन सत्र में प्रस्ताव पारित

संवाददाता,पटना

भारत तिब्बत मैत्री संघ बिहार और जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में तिब्बत मुक्ति साधना और भारत चीन संबंध पर आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि दलाई लामा को भारत रत्न सम्मान दिया जाये. साथ ही भारत की संसद की तरफ से चीन की तरफ से अधिगृहित भूमि को मुक्त करने की मांग भी की गयी. प्रस्ताव में बिहार सरकार से कहा गया कि दलाई लामा को बिहार विधानमंडल के संयुक्त सत्र को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया जाये.

इस दौरान सत्र की अध्यक्षता भारत-तिब्बत मैत्री संघ, बिहार के अध्यक्ष डॉ हरेंद्र कुमार ने की. सत्र का संचालन प्रो उमेश नीरज ने किया. प्रस्ताव में लद्दाख में हो रही चीनी अतिक्रमण की निंदा की गयी. प्रस्ताव में कहा गया कि भारत हिमालय नीति बनाए. चीनी सामग्रियों का बहिष्कार किया जाए. बिहार एवं झारखंड से प्राप्त बौद्ध अवशेषों को संरक्षित किया जाए.

इस दौरान 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस और आगामी 10 मार्च को जनक्रांति दिवस को प्रत्येक जिले में आयोजित करने का निर्णय लिया गया. छात्र एवं युवाओं के बीच ज्यादा- से- ज्यादा संगठन विस्तार करने का निर्णय लिया गया. इस दौरान आग्रह किया गया कि दलाई लामा को बोधगया में बौद्ध संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध कराये.

समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी सहजानंद सरस्वती ट्रस्ट के डॉ सत्यजीत सिन्हा, भारत-तिब्बत मैत्री संघ के महासचिव मनोज कुमार, प्रो हितेंद्र पटेल, डॉ मार्टिना, उमा घोष एवं तिब्बत के दो सांसदों ने भाग लिया. धन्यवाद ज्ञापन जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक डॉ नरेंद्र पाठक ने किया. सेमिनार में विभिन्न जिलों जैसे बेगूसराय, जहानाबाद, गया, फारबिसगंज, नवादा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, वैशाली, भोजपुर, रोहतास, एवं नालंदा के प्रतिनिधियों ने अपने संगठन संबंधी चर्चा की.

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