नेशनल. पेट्स डे आज पटना पेट्स या पालतू पशु हमारे परिवार के बेहद प्यारे सदस्यों में से एक होते हैं, जो हमारे दिन को प्यार, खुशियों और अपनेपन से भर देते हैं. उनकी ईमानदारी और लगाव हमें निःस्वार्थ प्यार की खूबसूरती की याद दिलाते हैं. नेशनल पेट्स डे उनके साथ जुड़ाव व उनकी देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करता है. आज अधिकांश घरों में आपको पेट लवर जरूर मिलेंगे. ऐसे में हम जितनी उनकी परवाह करते हैं, वे उससे कहीं ज्यादा हमारी परवाह करते हैं. उनके साथ न केवल अकेलापन दूर होता है बल्कि आज जिस तरह की जीवनशैली है, उससे होने वाला तनाव भी कम होता है. ………………………………….. पेट्स आपके लिए स्ट्रेस बस्टर का काम करते हैं अगर आप तनाव से जूझ रहे हैं, तो पेट्स रखना आपके लिए फायदेमंद है. ऐसे बहुत से लोग हैं, जिनके घर पेट्स आने के बाद उनका स्ट्रेस लेवल काफी हद तक कम हो गया. जानकार बताते हैं कि पेट्स के घर में होने से जो लगाव घर के लोगों को उससे होता है, उससे ऑक्सीटोसिन का स्राव होता है और कार्टिसोल (तनाव हार्मोन) कम होता है. इससे दिमाग और मन शांत होता है. चिंता कम होती है. एक स्टडी में खुलासा किया जा चुका है कि पेट के साथ अगर 20 से 25 मिनट बिताए जाएं, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर कम हो जाता है. ……………………………….. पेट्स लवर ने कहा- यह स्ट्रेस बस्टर की तरह होते हैं पेट्स अकेलेपन से जूझ रहे लोगों के लिए अच्छे साबित होते हैं. यह आपके साथ इमोशनली कनेक्ट होते हैं. जितनी बार इनके साथ समय बीताते हैं आपका स्ट्रेस दूर होता है. यह स्ट्रेस बस्टर की तरह होते हैं. – डॉ विवेक विशाल, मनोचिकित्सक …………………………… मैं पेशे से प्रोफेशनल फोटोग्राफर हूं. ऐसे में असाइमेंट्स और एक्सट्रा घंटों का काम होता है. उस वक्त काफी स्ट्रेस में रहती थी, लेकिन पिछले तीन सालों में बहुत अंतर आया है. मेरी पॉमेरियन डॉग लोलो जब से मेरे घर आयी मुझे एक इमोशनल सपोर्ट मिला. – प्रीति कंठलाल, बोरिंग रोड ………………………. मेरे पेट का नाम चार्ली है, जो एक जर्मन शेफर्ड है. वह पिछले सात सालों से हमारे साथ है. उसे फैमिली के साथ रहना और घूमना पसंद है. वह खाना भी हमारे साथ खाता है. घर पर कभी इसे बांधकर नहीं रखा, क्योंकि यह हमारे घर का सबसे खास सदस्य है. – शिवम कश्यप, रामकृष्णा नगर