पटना से सुबोध कुमार नंदन की रिपोर्ट
Patna ISKCON: राजधानी के बुद्ध मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर में सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर श्री जगन्नाथ स्नान उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया. हरे कृष्ण संकीर्तन से शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया.
सहस्र जल से हुआ भगवान का महाभिषेक
कार्यक्रम के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का पंचगव्य एवं सहस्र जल से महाभिषेक किया गया. महाभिषेक के बाद भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया. इसके पश्चात महाप्रभु ने पारंपरिक गजावेश में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए. महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया.
स्नान पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
इस्कॉन टीएमसी के को-चेयरमैन रमण मनोहर दास ने बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा को देव पूर्णिमा या स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा इंद्रद्युम्न ने इसी दिन भगवान जगन्नाथ का प्रथम स्नान उत्सव आयोजित किया था. उन्होंने बताया कि महाभिषेक के बाद भगवान 15 दिनों के अनासर काल में विश्राम करते हैं और इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भव्य रथयात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं.

Patna ISKCON में गजावेश की परंपरा का इतिहास
टीएमसी सदस्य राधापति चरण दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ ने अपने परम भक्त गणपति भट्ट को गणेश स्वरूप में दर्शन दिए थे. इसी घटना की स्मृति में स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान को गजावेश में सजाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है.
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
स्नान उत्सव के दौरान मंदिर (Patna ISKCON) परिसर भक्तों की उपस्थिति से गुलजार रहा. वेणू विनोद दास सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और महाप्रसाद ग्रहण किया. धार्मिक माहौल और संकीर्तन से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा.
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