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Home बिहार पटना हृदय रोग के इलाज में नई तकनीक की एंट्री, अब बिना स्टेंट भी खुल सकेगी ब्लॉकेज नसें

हृदय रोग के इलाज में नई तकनीक की एंट्री, अब बिना स्टेंट भी खुल सकेगी ब्लॉकेज नसें

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हृदय रोग के इलाज में नई तकनीक की एंट्री, अब बिना स्टेंट भी खुल सकेगी ब्लॉकेज नसें
बिहार इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 कांफ्रेंस

Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट)
पटना के गांधी मैदान स्थित एक होटल में आयोजित बिहार इंटरवेंशनल काउंसिल 2026 कॉन्फ्रेंस में हृदय रोगों के इलाज से जुड़ी नई तकनीकों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस चटर्जी, डॉ. संजीव कुमार और आईजीआईसी के डॉ. संदीप कुमार सहित अन्य चिकित्सकों ने किया.

बिना स्टेंट ब्लॉकेज खोलने की नई तकनीक

कोच्चि से आए हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जबीर अब्दुल्लाह कुट्टी ने बताया कि हृदय की छोटी नसों में होने वाले ब्लॉकेज को अब बैलून तकनीक के माध्यम से खोला जा सकता है. इसके लिए हर मामले में स्टेंट लगाने की जरूरत नहीं होगी. यह प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो सकती है और मरीज के लिए अधिक सुविधाजनक मानी जा रही है.

अब बिना तार के लगेगा पेसमेकर

कोलकाता से आए डॉ. देवदत्ता भट्टाचार्य ने कॉर्डलेस यानी बिना तार वाले पेसमेकर की तकनीक पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस नई तकनीक से मरीजों की रिकवरी पहले की तुलना में अधिक तेजी से होती है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है.

चार-पांच ब्लॉकेज का इलाज भी हुआ आसान

आईजीआईसी के डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि पहले हृदय में चार या पांच ब्लॉकेज होने पर इलाज काफी जटिल माना जाता था. लेकिन आधुनिक तकनीकों की मदद से अब ऐसे मरीजों का इलाज भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संभव हो गया है.

नवजात शिशुओं के दिल की बीमारी का भी बेहतर इलाज

कोच्चि से आए डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि यदि किसी नवजात के दिल में छेद हो तो अब घबराने की जरूरत नहीं है. आधुनिक उपकरणों और तकनीकों की मदद से जन्म के एक महीने बाद ही सर्जरी की जा सकती है. इससे बच्चों का इलाज पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है.

500 से अधिक चिकित्सक हुए शामिल

दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों से 500 से अधिक चिकित्सक भाग ले रहे हैं. पहले दिन करीब 40 विशेषज्ञों ने हृदय रोग, उपचार और नई तकनीकों पर अपने अनुभव और शोध साझा किए. विशेषज्ञों ने कहा कि इन नई तकनीकों को बिहार के अस्पतालों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज मिल सके.

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