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कैंपस : आयुष के लिए 2021 बैच से लागू होगा नेक्स्ट

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कैंपस : आयुष के लिए 2021 बैच से लागू होगा नेक्स्ट

संवाददाता, पटना

आयुष के लिए राष्ट्रीय एक्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) 2021-2022 बैच से लागू होगा. एनआइसीएसएम और एनसीएच अधिनियम, 2020 के तहत 2021-22 शैक्षणिक सत्र में नामांकित छात्रों पर नेक्स्ट लागू किया जायेगा. छात्रों की चिंताओं की समीक्षा के बाद गठित समिति ने यह फैसला लिया है. समिति की अध्यक्षता प्रो संजीव शर्मा ने की है. उनकी सिफारिशों के बाद यह लागू किया गया है.

लाइसेंस और नामांकन के लिए जरूरी है नेक्स्ट

एक साल की इंटर्नशिप पूरी करने के बाद राज्य या राष्ट्रीय रजिस्टर में लाइसेंस और नामांकन के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है. इसकी संरचना एक समस्या-आधारित परीक्षा है, जिसमें व्यावहारिक कौशल का मूल्यांकन करने के लिए नैदानिक मामले के परिदृश्य, चित्र और वीडियो शामिल हैं. ऐसे इंटर्न जिन्होंने अपनी इंटर्नशिप पूरी नहीं की है, लेकिन नेक्स्ट में अर्हता प्राप्त कर लेते हैं, वे एक साल की इंटर्नशिप पूरी करने के बाद ही राज्य या राष्ट्रीय पंजीकरण बोर्ड में पंजीकरण कर सकेंगे. राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआइएसएम) अधिनियम 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) अधिनियम, 2020 क्रमशः 11 जून, 2021 और 5 जुलाई, 2021 से प्रभावी हुए थे. एनसीआइएसएम अधिनियम 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) अधिनियम, 2020 के प्रावधानों के तहत आयोगों द्वारा इन अधिनियमों के लागू होने की तारीख से तीन साल के भीतर राष्ट्रीय एक्जिट टेस्ट (नेक्स्ट) आयोजित किया जाना आवश्यक है. मंत्रालय ने कहा है कि हमारा उद्देश्य आयुष शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा मानकों की गुणवत्ता बनाये रखने के साथ-साथ निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करी है. सभी नागरिकों के स्वास्थ्य और भलाई पर केंद्रित एक प्रमुख राष्ट्रव्यापी अभियान ””देश का प्रकृति परीक्षण अभियान”” भी शुरू किया. उन्होंने यह भी कहा कि अभियान का नेतृत्व आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग द्वारा किया जायेगा. इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक प्रथाओं के माध्यम से स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है. इस अभियान में 4.5 लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जिनमें 1,35,000 छात्र, 20,000 स्नातकोत्तर छात्र, 18,000 शिक्षक और तीन लाख चिकित्सक शामिल हैं. मंत्री ने आगे कहा कि इस अभियान का लक्ष्य पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है और यह प्रधानमंत्री के आयुर्वेद को दैनिक जीवन में शामिल करने के दृष्टिकोण से जुड़ा है, जो ””जन-जन तक आयुर्वेद”” ””हर-घर आयुर्वेद”” के मंत्र में समाहित हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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