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Home बिहार पटना DGP को लिखी चिट्ठी ने पुलिस के उड़ाए होश! क्या एंबुलेंस से लेकर ICU तक रची गई साजिश?

DGP को लिखी चिट्ठी ने पुलिस के उड़ाए होश! क्या एंबुलेंस से लेकर ICU तक रची गई साजिश?

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DGP को लिखी चिट्ठी ने पुलिस के उड़ाए होश! क्या एंबुलेंस से लेकर ICU तक रची गई साजिश?
NEET Student Death Case Family Letter छात्रा के परिजन ने बिहार डीजीपी को जो लेटर भेजा है उसमें कई अहम सवाल उठाए हैं. प्रतिकात्‍मक तस्‍वीर

NEET Student Death Case Family Letter : बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) छात्रा की मौत का मामला अब एक साधारण ‘मेडिकल केस’ नहीं रह गया है. परिजनों की ओर से बिहार के डीजीपी (DGP) को लिखी एक चिट्ठी ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. और सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्‍या छात्रा की मौत की जांच सही दिशा में है!

एम्‍बुलेंस से लेकर ICU तक साजिश

माना जा रहा था कि नीट छात्रा की मौत से जल्‍द ही पर्दा हटने वाला है. पुलिस विभाग के सूत्रों का कहना है कि डीजीपी को जांच की रिपोर्ट सौंप दी गई है. केवल एम्‍स की रिपोर्ट का इंतजार है लेकिन परिजनों ने जो सवाल उठाए हैं, उसके आधार पर मामला उलझता नजर आ रहा है. पत्र ने सीधे तौर पर इशारा किया है कि एंबुलेंस से लेकर अस्पताल के ICU बेड तक, इस बेटी के खिलाफ साजिश रची गई थी.

पहली कड़ी: ‘लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है…’

चिट्ठी में सबसे बड़ा खुलासा ‘नर्स’ को लेकर है किया है. जिसने 7 जनवरी की रात छात्रा को छात्रा को एंबुलेंस की गाड़ी से उतारा था. परिजनों के अनुसार, उस नर्स ने मां को कहा था—’लड़की के साथ बहुत गलत हुआ है.’

आखिर नर्स ने ऐसा क्‍या देखा?

अब सवाल उठता है कि एंबुलेंस से अस्पताल तक लाए जाने पर इस नर्स स्ट्रेचर पर लेटी छात्रा के साथ ऐसा क्या हुआ देखा या महसूस किया! जिसके आधार पर उसने लड़की के साथ ‘गलत’ होने का आभास हुआ? क्या SIT (विशेष जांच दल) ने उस नर्स को ढूंढने और उससे बात कर स्थिति की जानकारी लेने की जहमत उठाई? परिजनों का आरोप है कि पुलिस इस ‘आई विटनेस’ को जानबूझकर अनदेखा कर रही है.

दूसरी कड़ी: गायब कपड़े! क्‍या सबूत मिटाने की कोशिश

इस तरह के अपराध में पीड़िता के कपड़े सबसे बड़ा सबूत होते हैं. लेकिन इस मामले लड़की के कपड़े परिजनों को नहीं दिए गए. यहां प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की भूमिका संदिग्ध नजर आती है. पत्र में परिजनों का आरोप है कि छात्रा ने घटना के समय जो कपड़े पहने थे, वे अस्पताल ने गायब कर दिए. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर उन कपड़ों में ऐसा क्या था? जिसे दुनिया की नजरों से छिपाना जरूरी था! क्या उन कपड़ों पर किसी दरिंदगी के निशान थे?

तीसरी कड़ी : ICU की दवा 

पिता के पत्र के अनुसार साजिश की जड़ें अस्पताल के ICU तक फैली नजर आती हैं. पत्र के 8वें प्‍वाइंट के अनुसार, 9 जनवरी तक डॉक्टर अभिषेक परिजनों को बता रहे थे कि बच्ची को ‘वायरल मेनिन्जाइटिस’ है और उसे Acyclovir दवा दी जा रही है. लेकिन जैसे ही मामला मीडिया में उछला, कहानी कैसे बदल गई?

चौथी कड़ी : डॉक्टर का यू-टर्न!

परिजनों का कहना है कि अचानक ‘नींद की गोली’ और ‘ड्रग अब्यूज’ का एंगल सामने लाया गया. परिजनों ले डीजीपी को लिखे पत्र में सीधा सवाल किया है— जब डॉक्टर खुद दिमाग में क्लॉट (रक्त का थक्का) की बता रहे थे, तो फिर बिना किसी ठोस फोरेंसिक रिपोर्ट के इसे ड्रग्स का मामला बताकर केस को दबाने की कोशिश क्यों हो रही है?

पांचवी कड़ी: क्‍या खाकी और रसूखदारों का ‘गठबंधन’?

चिट्ठी में चित्रगुप्त नगर की थाना प्रभारी रोशनी कुमारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं. इस आरोप से पुलिस भी इन्‍कार नहीं कर सकती है. इधर, परिजनों ने भी जांच को शुरू से भटकाने का आरोप लगाया है. परिजनों का कहना है कि हॉस्टल मालिक मनीष रंजन और संचालिका नीलम अग्रवाल के मोबाइल CDR की जांच न होना, इस शक को पुख्ता करता है. परिजनों को शह है कि पर्दे के पीछे से कोई ‘पावरफुल हाथ’ हैं. जो इस केस को रफा-दफा करने में लगे हैं.

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Neet student death case family letter to dgp bihar

पूरा बिहार मांग रहा है जवाब

नीट छात्रा की मौत ने पूरे प्रदेश को आक्रोशित कर दिया है. DGP को भेजी गई यह 8 बिंदुओं वाली चिट्ठी अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है. लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिहार में अब बेटियां हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं हैं? अब सबकी नजरें पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं. क्या DGP इस ‘साजिश’ की परतें खोलने को नए सिरे से आदेश देंगे, या फिर ये चिट्ठी भी सिस्टम की फाइलों में कहीं दफन हो जाएगी?

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