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नालंदा से पटना तक फैला है हथियार तस्करों का जाल

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नालंदा से पटना तक फैला है हथियार तस्करों का जाल

पटना. नालंदा जिले के चिकसौरा थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव में पकड़ी गयी मिनीगन फैक्ट्री ने अवैध हथियारों के संगठित नेटवर्क की परतें खोल दी हैं. यह महज एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि गांव से शहर तक फैला एक सुव्यवस्थित सप्लाई सिस्टम था, जो लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है. बाजितपुर गांव में गुपचुप तरीके से देसी पिस्तौल तैयार किए जाते थे. फैक्ट्री किसी बड़े ढांचे में नहीं, बल्कि साधारण घर या कमरे में संचालित हो रही थी, ताकि किसी को शक न हो. यहां पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औजारों और कच्चे माल से हथियार बनाए जाते थे. गिरफ्तार मिस्त्री ने खोला राज गिरफ्तार मिस्त्री दिलीप विश्वकर्मा इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी था. वह हथियार बनाने में दक्ष था और ऑर्डर के अनुसार पिस्तौल तैयार करता था. पूछताछ में सामने आया है कि उसे पहले से ही इस तरह के काम का अनुभव था, जिसके कारण वह तेजी से उत्पादन कर पाता था. नेटवर्क का संचालन पूरी तरह डिमांड पर आधारित था. पटना के अपराधियों से पहले ऑर्डर लिया जाता था, फिर उसी हिसाब से हथियार बनाए जाते थे. इससे स्टॉक रखने की जरूरत नहीं पड़ती थी और पुलिस की नजर से बचना आसान हो जाता था. तैयार हथियारों को छोटे-छोटे हिस्सों में या छुपाकर पटना भेजा जाता था. सप्लाई के लिए स्थानीय संपर्कों और भरोसेमंद लोगों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि रास्ते में किसी तरह की जांच से बचा जा सके. डिलीवरी सीधे अपराधियों तक की जाती थी.कम कीमत में बड़ा नेटवर्क देसी पिस्तौल की कीमत 5 से 6 हजार रुपये के बीच रखी जाती थी, जो बाजार के हिसाब से काफी कम थी. यही वजह थी कि अपराधियों के बीच इनकी मांग लगातार बनी हुई थी और नेटवर्क तेजी से फैल रहा था. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह है, जिसमें कई लोग अलग-अलग भूमिकाओं में शामिल हैं. जल्द ही इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.

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