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Home बिहार पटना कैंपस : कैंसर की पहचान और निदान में गणितीय मॉडल का हो सकता है उपयोग

कैंपस : कैंसर की पहचान और निदान में गणितीय मॉडल का हो सकता है उपयोग

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कैंपस : कैंसर की पहचान और निदान में गणितीय मॉडल का हो सकता है उपयोग

-आइआइटी पटना में कंप्यूटेशनल ऑन्कोलॉजी पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न संवाददाता, पटना आइआइटी पटना में कंप्यूटेशनल ऑन्कोलॉजी पर तीन दिवसीय कार्यशाला रविवार को समाप्त हो गयी. कार्यशाला में शिक्षा और उद्योग जगत से बायोसाइंस, बायोटेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, एमबीबीएस, ऑन्कोलॉजी और गणित जैसे विभिन्न विषयों से 69 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही. कार्यशाला के संयोजक डॉ प्रशांत श्रीवास्तव और डॉ मोहित जॉली ने बताया कि विशेषज्ञों के व्याख्यान के अलावा पोस्टर प्रस्तुति सत्र और सहयोगात्मक अनुसंधान पर एक पैनल चर्चा भी आयोजित की गयी. प्रो मोहित कुमार जॉली ने जटिल प्रणालियों के नजरिये से कैंसर की जांच करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि थेरेपी द्वारा संचालित कोशिका-स्थिति परिवर्तनों को समझने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया जा सकता है और यह मॉडल थेरेपी को डिजाइन करने में मदद कर सकते हैं. प्रो रामरे भट ने चर्चा की कि बाह्य मैट्रिक्स कैंसर मेटास्टेसिस की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है. डॉ दीक्षा भारतीय ने यह बताया कि आनुवंशिक पृष्ठभूमि के आधार पर, विशिष्ट कमजोरियों के आधार पर और चिकित्सकों के साथ बातचीत करके रोगियों के लिए निर्णय लेने का सुझाव देने के लिए जीनोम अनुक्रमण डेटा का विश्लेषण किया जा सकता है. प्रो पीके विनोद ने इंडिया पैथोलॉजी डेटाबेस (कैंसर पैथोलॉजी इमेजिंग बैंक का एक डिजिटल संग्रह) और मुख के कैंसर स्क्रीनिंग में प्रयासों का उल्लेख किया, जहां मुख के कैंसर के पूर्व-कैंसर घावों की पहचान करने के लिए एक गहन शिक्षण मॉडल को तैयार किया जा रहा है. प्रो अनूप सिंह ने मेडिकल इमेजिंग पहलुओं में एआइ की भूमिका पर चर्चा की. प्रो ईशान गुप्ता ने एक कैंसर रोगी की यात्रा और डेटा संग्रह के विभिन्न तौर-तरीकों का वर्णन किया, जिन्हें निदान, पूर्वानुमान और उपचार को निजीकृत करने के लिए विभिन्न मशीन लर्निंग मॉडल में डाला जा सकता है. डॉ विबिशन बी ने कई परस्पर क्रिया करने वाली प्रजातियों के बीच जनसंख्या वृद्धि मॉडल पेश किया और बताया कि प्रोस्टेट कैंसर की विविधता को पकड़ने के लिए बनाये गये ऐसे मॉडल संभावित रूप से सहायक हो सकते हैं. प्रो मुबाशेर रशीद, प्रो बीवी रथीश कुमार, प्रो प्रशांत श्रीवास्तव एवं डॉ मंजरी किरण ने भी अपनी बात रखी.

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