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Home बिहार पटना मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में क्यों नहीं मिली जगह, संगठन में मिलेगी बड़ी कुर्सी या दिल्ली की तैयारी?

मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में क्यों नहीं मिली जगह, संगठन में मिलेगी बड़ी कुर्सी या दिल्ली की तैयारी?

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मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में क्यों नहीं मिली जगह, संगठन में मिलेगी बड़ी कुर्सी या दिल्ली की तैयारी?
मंगल पांडे

Bihar Cabinet Expansion: बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बीच सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे को लेकर हो रही है. नई कैबिनेट में उनका नाम नहीं होने से कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. लंबे समय तक सरकार और संगठन दोनों में अहम भूमिका निभाने वाले मंगल पांडे को इस बार मंत्री पद नहीं मिलना सामान्य फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

सरकार से बाहर, संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की चर्चा

भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज है कि मंगल पांडे को सरकार से हटाकर संगठन में बड़ी भूमिका दी जा सकती है. बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कई राज्यों के प्रभारी तक रह चुके मंगल पांडे को संगठन का मजबूत चेहरा माना जाता है.

पार्टी उन्हें आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. चर्चा यह भी है कि 2029 लोकसभा चुनाव की तैयारी और बड़े राज्यों की चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका बढ़ सकती है. इसके अलावा, उन्हें केंद्रीय राजनीति में भेजे जाने की संभावना भी जताई जा रही है.

नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा अब बिहार में नए नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में बढ़ती दिख रही है. इस बार पार्टी ने कई नए चेहरों को मौका देकर साफ संकेत दिया है कि वह भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है.

मिथलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा जैसे नेताओं को आगे बढ़ाकर भाजपा ने ब्राह्मण समाज में भी नए विकल्प तैयार करने की कोशिश की है. पार्टी का मानना है कि नए चेहरों से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा बढ़ती है और राजनीतिक संदेश भी मजबूत जाता है.

सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश

मंगल पांडे ब्राह्मण समाज से आते हैं और बिहार भाजपा में इस वर्ग का बड़ा प्रभाव रहा है. लेकिन इस बार पार्टी ने सवर्ण समाज के भीतर अलग-अलग चेहरों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. माना जा रहा है कि भाजपा उत्तर बिहार और अन्य क्षेत्रों में अपने सामाजिक आधार को नए तरीके से मजबूत करना चाहती है. इसी वजह से मंत्रिमंडल में नए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण बनाए गए हैं.

एंटी इंकम्बेंसी से बचने का भी प्रयास

मंगल पांडे लंबे समय तक स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं. ऐसे में भाजपा नेतृत्व शायद यह भी चाहता था कि कुछ विभागों में नए चेहरे और नई कार्यशैली लाई जाए. लंबे समय तक एक ही भूमिका में रहने वाले नेताओं को कभी-कभी संगठनात्मक जिम्मेदारी देकर पार्टी नए प्रयोग करती है. इसे उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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राजनीतिक सफर खत्म नहीं, नई भूमिका की संभावना

मंगल पांडे का मंत्रिमंडल से बाहर होना उनके राजनीतिक करियर का अंत नहीं माना जा रहा. भाजपा में कई बार बड़े नेताओं को सरकार से हटाकर संगठन में ज्यादा प्रभावशाली भूमिका दी जाती रही है. अब सबकी नजर इस पर है कि पार्टी आने वाले दिनों में मंगल पांडे को बिहार, दिल्ली या राष्ट्रीय राजनीति में कौन सी नई जिम्मेदारी देती है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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