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नदियों को सूखने से बचाना जरूरी : मेधा पाटकर

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नदियों को सूखने से बचाना जरूरी : मेधा पाटकर

पटना. जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) के नदी घाटी मंच की ओर से अखिल भारतीय ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसका विषय ‘संविधान और लोकतंत्र बचाते हुए-नदियों के न्यायपूर्ण संरक्षण और नियोजन’ था. इस अवसर पर नदी बचाओ, जीवन बचाओ के पानी बचाओ, पर्यावरण बचाओ नारे के साथ नदियों को जीवित इकाई मानते हुए, उनके अविरलता और निर्मलता की गारंटी के लिए नदियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राष्ट्रीय कानून बनाने की मांग देश भर के संगठनों ने उठाई और सभी दलों के घोषणा पत्र में इसे शामिल करते हुए लिखित संकल्प व्यक्त करने की मांग की. वक्ताओं ने चुनावों को चुनौती मानते हुए दो चुनावों के बीच नदियों और पर्यावरण पर सतत कार्य करने को कहा. व्याख्यान को संबोधित करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र एवं एनएपीएम की मेधा पाटकर ने कहा कि नदियों को सूखने से बचाना है, विकास परियोजनाओं की समीक्षा करनी है, नदियों को गंदा किया जा रहा है खनन किया जा रहा है. क्रूज चलाया जा रहा है, हिमालय बर्बाद हो रहा है. इसलिए नदियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कानून का मसौदा बनाया गया है. मसौदे में नदियों के जीवन की रक्षा से छेड़छाड़ के लिए दंड का प्रावधान भी है. कोसी के समाधान की भी बात उठी कोसी नवनिर्माण मंच बिहार के महेंद्र यादव ने कोसी और बिहार की नदियों का उदाहरण देते हुए कोसी तटबंध के भीतर सर्वे कराकर सभी को पुनर्वासित कराने, कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार को सक्रिय और प्रभावी बनाते हुए कोसी के समाधान के लिए सरकार समाज को साथ आने की बात की. साथ ही सभी नदियों के कटाव पीड़ितों को बसाने की नीति बनाने, बिहार में तटबंधों की समीक्षा करने, छोटी नदियों के पुनर्जीवन और जलजमाव के क्षेत्र में जल निकासी पर बिहार में कार्य करने की जरूरत पर बल दिया. बरगी एवं बसनिया बांध संघर्ष मध्य प्रदेश के राजकुमार सिन्हा ने बरगी बांध और नर्मदा में बांधो की शृंखला के दुष्प्रभावों को उठाया, मानसी ने हिमालय में डैम और टनल के दुष्प्रभावों के गंभीर सवालों को उठाते हुए धंसते जोशी मठ को बचाने की बात की. ऑल केरला रिवर प्रोटेक्शन काउंसिल केरला के एसपी रवि ने केरल में पेरियार नदी और दो राज्यों के बीच के नदियों के विवादों को खत्म करने के लिए लोक संवाद पर बल दिया. पर्यावरण सुरक्षा समिति गुजरात के कृष्णकांत चौहाण ने गुजरात की साबरमती की दुर्दशा के बारे में बताया. कार्यक्रम का संचालन मुदीता विद्रोही ने किया.

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