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बिहार में राष्ट्रीय औसत से अधिक महंगाई, चावल-दाल खरीदने में ही खाली हो जा रहा है बटुआ

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बिहार में राष्ट्रीय औसत से अधिक महंगाई, चावल-दाल खरीदने में ही खाली हो जा रहा है बटुआ
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Inflation in Bihar: पटना. बिहार में राष्ट्रीय औसत से अधिक महंगाई दर्ज की गयी है. चावल-दाल खरीदने में ही यहां के लोगों का बटुआ खाली हो जा रहा है. महंगाई को लेकर आये दिसंबर के आंकड़े बताते हैं कि देश में कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी आयी है. इसके चलते राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा महंगाई में गिरावट दर्ज की गयी है, लेकिन बिहार समेत देश के आठ राज्यों में खुदरा महंगाई राष्ट्रीय औसत 5.22 प्रतिशत से अधिक है. दिल्ली में राष्ट्रीय औसत से करीब आधी 2.51 प्रतिशत रही है. आंकड़ों से पता चलता है कि इन आठ राज्यों में लोगों को जरूरत का सामान खरीदने के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है.

खुदरा महंगाई आठ राज्यों में राष्ट्रीय औसत से अधिक

थोक महंगाई के आंकड़ों से पहले सोमवार को खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी किए गए थे, जिसमें नवंबर के मुकाबले नरमी देखी गई, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि देश के आठ राज्यों में खुदरा महंगाई राष्ट्रीय औसत 5.22 प्रतिशत से अधिक है. मणिपुर में थोक महंगाई सबसे अधिक 9.4 प्रतिशत दर्ज की गई है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर अरुण कुमार मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि आठ राज्यों में खुदरा महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. मणिपुर में सबसे अधिक 9.4 प्रतिशत महंगाई दर है. इसके पीछे, सीधा कारण है कि वहां पर स्थिति तनावपूर्ण है, जिससे लोगों की जरूरत के सामान की सप्लाई प्रभावित हो रही है.

बिहार में ज्यादा महंगाई दर की दो वजह

बिहार जैसे राज्यों में महंगाई दर राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के दो मुख्य कारण नजर आते है. नंबर एक, आर्थिक रूप से कमजोर इन राज्यों में लोगों की आमदनी का बड़ा हिस्सा खाद्य वस्तुओं पर खर्च होता है. जहां पर श्रमिकों की संख्या अधिक होती है, वहां पर खाने पर खर्च अधिक होता है. दूसरा कारण, इन राज्यों में कई खाद्य वस्तुओं का उत्पादन नहीं होता, जिसमें दालें, मसाले और खाद्य तेल मुख्य रूप से शामिल है, जिससे ऐसे सामान को दूसरे राज्यों से मंगाने पर ज्यादा खर्च होने की वजह से कीमतें पर प्रभाव पड़ रहा होगा. जैसे बिहार चीनी उत्पादक राज्य नहीं रहा. इनकी निर्भरता अब दूसरे राज्यों पर है, जिसकी वजह से चीनी की कीमतें भी दूसरे राज्यों के मुकाबले ज्यादा होंगी.

यूपी में शहर से अधिक गांवों में महंगाई

उत्तर प्रदेश में शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र में महंगाई दर्ज की गयी है. यूपी में शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र में महंगाई ज्यादा है. दिसंबर में ग्रामीण क्षेत्र में महंगाई दर 6.89 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि शहरी क्षेत्र में 5.16 प्रतिशत रही है. वहीं, उत्तराखंड में ग्रामीण क्षेत्र की महंगाई दर 5.82 और शहरी क्षेत्र की 6.41 प्रतिशत रही है. झारखंड में भी स्थिति यह है. जहां पर ग्रामीण महंगाई दर 4.19 प्रतिशत रही है और शहरी दर 4.99 प्रतिशत दर्ज की गई. बिहार की बात करें तो वहीं ग्रामीण महंगाई दर 7.29 और शहरी 7.57 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई है.

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