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Home बिहार पटना 28 दिन पहले मिलेगी जानलेवा गर्मी की चेतावनी, वैज्ञानिकों ने खोजा नम लू पहचानने का तरीका

28 दिन पहले मिलेगी जानलेवा गर्मी की चेतावनी, वैज्ञानिकों ने खोजा नम लू पहचानने का तरीका

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28 दिन पहले मिलेगी जानलेवा गर्मी की चेतावनी, वैज्ञानिकों ने खोजा नम लू पहचानने का तरीका
अब पहले मिलेगी जानलेवा गर्मी की चेतावनी

Wet Heatwave: भारत में मानसून राहत देने वाला मौसम माना जाता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके बीच छिपे एक बड़े स्वास्थ्य खतरे को लेकर चेतावनी दी है. इसे नम लू या बेहद उमस भरी गर्मी कहा जा रहा है. यह सूखी लू से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. रिसर्च के मुताबिक देश की एक अरब से अधिक आबादी इस खतरे की जद में आ सकती है. खास बात यह है कि अब इस तरह की स्थिति का अंदाजा करीब 4 हफ्ते पहले लगाया जा सकता है.

वैज्ञानिकों ने खोजा नया पैटर्न

क्लाइमेट डायनेमिक्स में छपे स्टडी में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, यूके मौसम विभाग और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक शामिल थे. उन्होंने 1940 से 2023 तक के मौसम डेटा और 261 मानसून घटनाओं का स्टडी किया. इससे पता चला कि मानसून के दौरान एक खास मौसम पैटर्न बनता है. इससे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आर्द्र गर्मी का खतरा 125 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

क्यों ज्यादा खतरनाक है नम लू

वैज्ञानिकों के अनुसार यह खतरा वेट-बल्ब तापमान से जुड़ा है. इसमें हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में शरीर का पसीना सूख नहीं पाता और शरीर ठंडा नहीं हो पाता. इससे कुछ ही घंटों में हीटस्ट्रोक और दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इस रिसर्च के मुख्य लेखक अक्षय देवरास का कहना है कि लोग सूखी गर्मी यानी लू से तो सावधान रहते हैं, लेकिन मानसून की उमस भरी गर्मी को हल्के में लेते हैं. यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है.

किन इलाकों में ज्यादा असर

अध्ययन के अनुसार जब मानसून सक्रिय रहता है, तब उत्तर प्रदेश और बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों में यह खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं जब मानसून कमजोर पड़ता है, तो यह असर दक्षिण और तटीय इलाकों की तरफ शिफ्ट हो जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर 4 हफ्ते पहले चेतावनी मिल जाए, तो प्रशासन बेहतर तैयारी कर सकता है. अस्पतालों में स्टाफ बढ़ाया जा सकता है, बिजली की मांग को संभाला जा सकता है और मजदूरों या बच्चों के काम और स्कूल के समय में बदलाव किया जा सकता है.

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जलवायु को आसान भाषा में समझाने की कोशिश

यह रिसर्च सिंप्लीफाइंग साइंस नाम के कार्यक्रम का हिस्सा है. इसे असर सोशल इम्पैक्ट एडवाइजर्स ने तैयार किया है. इसका मकसद लोगों को जलवायु परिवर्तन और उसके असर के बारे में आसान भाषा में जागरूक करना है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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