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Home बिहार पटना 30 साल का हुआ आइजीआइएमएस का नेत्र संस्थान, अब राष्ट्रीय स्तर की बनी पहचान

30 साल का हुआ आइजीआइएमएस का नेत्र संस्थान, अब राष्ट्रीय स्तर की बनी पहचान

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30 साल का हुआ आइजीआइएमएस का नेत्र संस्थान, अब राष्ट्रीय स्तर की बनी पहचान

– बच्चों की आंखों की बीमारियों पर केंद्रित रहा 30वां स्थापना दिवस – स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे के प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञ संवाददाता, पटना इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस), पटना के क्षेत्रीय चक्षु संस्थान (आरआइओ) ने शनिवार को अपनी स्थापना की 30वीं वर्षगांठ मनायी. इसे बाल नेत्र विज्ञान को समर्पित किया गया. मौके पर आयोजित सीएमइ कार्यक्रम में भारत और नेपाल के कुल 22 राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय नेत्र विशेषज्ञों ने शिरकत की. कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि इसमें बच्चों में होने वाली गंभीर नेत्र समस्याओं जैसे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, मायोपिया, रेटिनोब्लास्टोमा और आरओपी (रेटिनोपैथी आफ प्रीमैच्योरिटी) पर गहन चर्चा हुई. कार्यक्रम आइजीआइएमएस के उपनिदेशक व आरआइओ के चीफ प्रो डॉ विभूति प्रसन्न सिन्हा की देखरेख में आयोजित यह सीएमइ कार्यक्रम न केवल चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि बाल नेत्र देखभाल के क्षेत्र में बिहार को नयी दिशा देने वाला साबित हुआ. अब आरआइओ राष्ट्रीय स्तर का बन चुका है नेत्र संस्थान कार्यक्रम में आल इंडिया आप्थल्मोलाजिकल सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ ललित वर्मा ने रेटिनल इंटरफेस डिजीजेस पर अत्यंत उपयोगी जानकारी साझा की. एम्स नयी दिल्ली के डॉ राधिका टंडन ने आप्थल्मोलाजी में नवीन शिक्षण माड्यूल्स पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया. मुख्य अतिथि अतिथि व एम्स आरपी सेंटर के पूर्व प्रमुख प्रो राजवर्धन आजाद ने कहा कि आइजीआइएमएस का यह आरआइओ तीसरे दशक में प्रवेश करते ही राष्ट्रीय स्तर का नेत्र संस्थान बन चुका है. यहां काफी संभावनाएं हैं. जरूरत है सभी को सेवाभाव के साथ अपनी योगदान देने का. आरआइओ के प्रमुख डॉ विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि अब हमारा संस्थान न केवल इलाज, बल्कि रिसर्च और ट्रेनिंग का राष्ट्रीय केंद्र बन रहा है. 2025 से यहां हर वर्ष 10 पोस्टग्रेजुएट छात्रों को प्रशिक्षण के लिए प्रवेश मिलेगा. इस दौरान डॉ राजवर्धन आजाद की लिखित पुस्तक सोने की हाथ, डॉ विभूति सिन्हा, डॉ निलेश मोहन, डॉ अनिकेत और डॉ अभिषेक आनंद की ओर से लिखित नेत्र विज्ञान में आनुवंशिकी पुस्तक का विमोचन किया गया. 180 से अधिक प्रसिद्ध डॉक्टरों ने तकनीकी सत्र में रखीं अपनी बातें तकनीकी सत्र में देश के दिग्गज डाॅक्टर शामिल हुए. इसमें एम्स नयी दिल्ली से डॉ राजेश सिन्हा, डॉ एम वंती, डॉ मनीष सिंह, हैदराबाद से डॉ सुभद्रा जलाली, कोलकाता से डाॅ अमिताभ, नेपाल से डॉ ललित अग्रवाल, बीएचयू से डॉ दीपक मिश्रा ने व्याख्यान दिया. इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स आरपी सेंटर के पूर्व प्रमुख प्रो राजवर्धन आजाद, आइजीआइएमएस निदेशक डॉ बिंदे कुमार, डीन डॉ ओम कुमार, आरआइओ प्रमुख डॉ विभूति प्रसन्न सिन्हा, डॉ निलेश मोहन ने किया. कार्यक्रम में बिहार के 180 से अधिक नेत्र चिकित्सकों ने भाग लिया, इनमें अधिकतर पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थी थे. बिहार आप्थल्मोलाजिकल सोसाइटी के सहयोग से आयोजित इस सीएमइ में डॉ सुभाष प्रसाद, डॉ सत्यजीत सिन्हा, डॉ नागेंद्र प्रसाद, डॉ सुधीर कुमार, डॉ प्रणव रंजन, डॉ रंजना कुमार भी थे. आयोजन के सफलता में इसमें डॉ अभिषेक आनंद, डॉ अंकिता सिंह, डॉ शिवानी सिन्हा एवं पूरी आरआइओ टीम की अथक मेहनत रही.

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