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बिना प्रवेश परीक्षा के होता है 76 प्राइवेट फार्मेसी संस्थाओं में नामांकन

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बिना प्रवेश परीक्षा के होता है 76 प्राइवेट फार्मेसी संस्थाओं में नामांकन

राज्य सरकार के पास सिर्फ सात फार्मेसी संस्थान हैं, जिनमें होती है प्रवेश परीक्षा संवाददाता,पटना बिहार में तकनीकी संस्थानों में नामांकन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षाओं के माध्यम से कराया जाता है. चाहे वह नर्सिंग कोर्स, पारा मेडिकल कोर्स, ऑकुपेशनल एंड फिजियोथेरापी कोर्स हो. ऐसे कोर्स में दाखिला एक कॉमन टेस्ट के माध्यम से लिया जाता है. प्राइवेट फार्मेसी संस्थान जो डिप्लोमान इन फार्मेसी और बैचलर ऑफ फार्मेसी की डिग्री देते हैं ,उनमें दाखिला के लिए ऐसी कोई सामान्य प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन नहीं होता है. राज्य में करीब 76 ऐसे प्राइवेट फार्मेसी संस्थान संचालित हो रहे हैं. राज्य सरकार के पास सिर्फ दो ही बी फार्मा के संस्थान हैं, जिनमें नामांकन बीसीइसीइबी परीक्षा के माध्यम से किया जाता है. राज्य सरकार द्वारा राजकीय फार्मेसी संस्थान गुलजारबाग और एमआइटी, मुजफ्फरपुर में बी फार्मा की पढ़ाई होती है. इन दोनों संस्थानों में बी फार्म की 100-100 सीटें आवंटित हैं. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री निश्चय पार्ट-2 के तहत राज्य में पांच जिलों में फार्मेसी कॉलेजों की स्थापना की गयी है. इसमें फार्मेसी कॉलेज नालंदा, सीवान, बांका, समस्तीपुर और रोहतास शामिल हैं. इनमें समस्तीपुर में अभी तक फार्मेसी की पढ़ाई नहीं होती है. पांच नये सरकारी फार्मेसी संस्थानों में 60-60 सीटें आवंटित की गयी हैं. इसके अलावा प्राइवेट क्षेत्र में कुल 76 संस्थान हैं. इन संस्थानों में 60 से लेकर 100 सीटों की स्वीकृति दी गयी है. प्राइवेट फार्मेसी संस्थानों की स्थिति तो यह है कि अभी तक इन सभी संस्थानों ने बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में अपना रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया है. सभी प्राइवेट संस्थानों में विद्यार्थियों के नामांकन को लेकर कोई प्रवेश परीक्षा नहीं आयोजित की जाती है. कोर्स पूरा करने के बाद राज्य सरकार द्वारा गठित पारा मेडिकल कमेटी द्वारा परीक्षा लेकर डिग्री दी जाती है.

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