Dr Raqib Alam: दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के असिस्टेंट प्रोफेसर और बिहार के किशनगंज जिले के मूल निवासी डॉ. रकीब आलम ने रविवार को राजधानी पटना के होटल महाराज में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने समाज में बढ़ रही मानसिक विकृतियों पर गहरी चिंता जाहिर की और सरकार से राज्य के हर क्षेत्र में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स की बहाली और एक स्वतंत्र मानवता और शांति मंत्रालय के गठन की पुरजोर मांग की. इससे पहले डॉ. रकीब आलम ने बिहार के स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र और आवेदन सौंपा था, जिसे आज उन्होंने मीडिया के सामने प्रमुखता से रखा.
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. रकीब आलम ने कहा कि वर्तमान युग में मानवीय नैतिकता का पतन और सामाजिक विकृति एक गंभीर चिंता का विषय है. समाज में ‘नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर’ से पीड़ित व्यक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. ये आत्ममुग्ध व्यक्ति न केवल पारिवारिक और सामाजिक शांति को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुके हैं. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि इस विकार (NPD) से ग्रसित लोग दूसरों का गंभीर मानसिक और शारीरिक शोषण (नार्सिसिस्टिक एब्यूज) करते हैं. इसके शिकार मरीज गंभीर अवसाद (डिप्रेशन), पुरानी अनिद्रा (क्रोनिक इंसोमनिया), उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), भ्रम, तंत्रिका संबंधी कमजोरी और अत्यधिक हीन भावना का शिकार हो जाते हैं, जिसका अंत कई बार आत्महत्या के रूप में होता है.
डॉ. रकीब आलम ने मीडिया को विशेष रूप से बताया कि उन्होंने इस गंभीर विषय पर PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) पोर्टल पर भी शिकायत और सुझाव दर्ज कराया था. इसके जवाब में PMO ने सूचित किया है कि देश के 767 जिलों में ‘डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ (DMHP) को मंजूरी दी जा चुकी है. डॉ. आलम ने बिहार सरकार से आग्रह किया कि वह केंद्र की इस योजना का भरपूर लाभ उठाते हुए इसे जमीनी स्तर पर मुस्तैदी से लागू करे. उन्होंने यह चौंकाने वाला खुलासा भी किया कि अपराध की दुनिया में सक्रिय अधिकांश अपराधी (जैसे हत्यारे, बलात्कारी, साइबर क्रिमिनल्स और लुटेरे) इसी मानसिक विकार से पीड़ित होते हैं. सामान्य आबादी में इनकी संख्या लगभग 1 से 2 प्रतिशत होती है, लेकिन अपने पाखंडी व्यवहार के कारण ये आसानी से बेनकाब नहीं हो पाते.
सरकार के समक्ष रखी गई मुख्य मांगें और सुझाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से डॉ. रकीब आलम ने बिहार सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं:
हर संस्थान में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स की नियुक्ति: राज्य के प्रत्येक जिले, न्यायालय, अस्पताल, पुलिस स्टेशन, पंचायत, विद्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स की तत्काल बहाली की जाए, ताकि NPD से ग्रस्त व्यक्तियों की पहचान कर जनता को उनके शोषण से बचाया जा सके.
विशेष ट्रेनिंग कोर्सेज की शुरुआत: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया कर्मियों और आम लोगों के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी (नैदानिक मनोविज्ञान) में विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं.पुनर्वास केंद्र की स्थापना: नार्सिसिस्टिक शोषण के शिकार पीड़ितों के मुफ्त उपचार और काउंसलिंग के लिए राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल में एक ‘रिहैबिलिटेशन सेंटर’ स्थापित किया जाए.
नई शिक्षा नीति (NEP-2020) का कार्यान्वयन
इसके तहत राज्य के सभी नागरिकों और छात्रों तक सार्वभौमिक मानवीय नैतिकता, भारतीय संवैधानिक मूल्यों, मानवाधिकारों और मनोविज्ञान व दर्शनशास्त्र की बुनियादी शिक्षा पहुंचाई जाए. प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में डॉ. रकीब आलम ने उम्मीद जताई कि बिहार सरकार और संबंधित मंत्रालय मानवता के अस्तित्व, सामाजिक न्याय और सतत शांति को बढ़ावा देने के लिए इन सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाएंगे.
