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परेशान मरीज अस्पताल छोड़ने को मजबूर

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परेशान मरीज अस्पताल छोड़ने को मजबूर

हड़ताल. पीएमसीएच में 60 से अधिक सर्जरी नहीं हो सकी, अस्पतालों की बढ़ायी गयी सुरक्षासंवाददाता, पटना पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर की हत्या के विरोध में सूबे के डॉक्टर आक्रोश में हैं. इस बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल के समर्थन का एलान किया था. इसका व्यापक असर देखा गया. डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण स्वास्थ्य सेवा चरमरा गयी है. लेकिन राहत वाली बात यह रही कि इमरजेंसी सेवा शुक्रवार देर शाम से शुरू हो गयी थी. पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) आइजीआइएमएस, एम्स, एनएमसीएच, एलएनजेपी अस्पताल, गार्डिनर रोड अस्पताल सहित अन्य अस्पताल में शनिवार को बड़ी संख्या में मरीज आये, लेकिन आउटडोर सेवा बंद रहने के कारण वापस लौट गये. साथ ही जांच घर से लेकर एक्सरे आदि बंद रहे. इलाज नहीं होने से दूर- दराज से आये मरीज के परिजन भटकते रहे. एक अनुमान के अनुसार शनिवार को इन अस्पतालों में से सात हजार से अधिक मरीज लौट गये. इधर, अस्पताल में हड़ताल के कारण बिचौलिए सक्रिय दिखे. वहीं हड़ताल के कारण पहले से भर्ती कई मरीज अस्पताल छोड़कर जाने की तैयारी कर रहे हैं. डॉक्टरों ने कहा कि हम डरे-सहमे हुए हैं. डॉक्टरों को सुरक्षा दी जाये. सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू हो, तभी हड़ताल खत्म करेंगे. हड़ताल के संबंध में पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइसी ठाकुर से कार्यालय में मिलने का प्रयास किया गया, तो आधे घंटे तक इंतजार करने के बाद बताया गया साहब बीमार हैं, नहीं मिलेंगे, जबकि अधिकारी और कर्मचारियों का आना-जाना लगा था. उपाधीक्षक अशोक कुमार झा ने भी मिलने से इन्कार कर दिया. वहीं घटना के बाद पीएमसीएच, एम्स में सुरक्षा बढ़ा दी गयी. वहीं आइएमए के आह्वान पर निजी क्लीनिक को बंद रखा गया. इधर, आइएमए एमएसएम व जेडीएम बिहार चैप्टर ने शनिवार की शाम कैंडल मार्च निकाला. आज होगा फैसला

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ महेश प्रसाद सिंह और प्रवक्ता डॉ विनय कुमार ने बताया कि शनिवार की हड़ताल पूरी तरह सफल रही. रविवार को सुबह 11 बजे संघ की कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया जायेगा. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए तुरंत केंद्रीय कानून लागू किया जाये. इसे लेकर राज्य सरकार को एक पत्र सौंपा जायेगा. 2500 मरीज बिना इलाज के लौटे

पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर एसो के सदस्य भी हड़ताल पर रहे. इसके कारण ओपीडी और इलेक्टिव सर्जरी का काम पूरी तरह ठप रहा. अध्यक्ष डॉ अंशुमाली ने बताया कि शनिवार देर शाम से इमरजेंसी सेवा चालू कर दी गयी है. पीएमसीएच में 60 से अधिक सर्जरी नहीं हो पायी. इसके अलावा 2500 से अधिक ओपीडी के मरीज को बिना इलाज कराये लौटना पड़ा. दोपहर में अस्पताल परिसर में ही डॉक्टरों ने मार्च निकाला. 1500 नर्सिंग स्टाफ ने जताया विरोध

पटना. उत्तराखंड में नर्स के साथ हुए रेप और मर्डर के विरोध में शनिवार को पीएमसीएच के 1500 नर्सिंग स्टाफ ने विरोध किया. बिहार ए ग्रेड नर्सेज एसो के आह्वान पर 1200 महिला नर्सिंग स्टाफ व 300 पुरुष स्टाफ काला बिल्ला लगा काम किया. सचिव बिथिका विश्वास ने बताया कि हमें बंदूक का लाइसेंस चाहिए. घर में बेटी है, बाहर शैतान है. इसलिए सुरक्षा चाहिए. प्रदर्शन में अमिता कुमारी, पूनम कुमारी, सुलेखा कुमारी, मृदुला कुमारी आदि रहीं. एनएमसीएच : इमरजेंसी सेवा बहाल पटना सिटी. एनएमसीएच में जूनियर डॉक्टर एसो की ओर से तीन दिनों से बंद रखे गये इमरजेंसी वार्ड में शनिवार की शाम से सेवा बहाल कर दी गयी है. ओपीडी अब भी बाधित है.जूनियर डाक्टर्स व अस्पताल प्रशासन की बैठक के बाद सेवा शुरू हुई. बैठक में प्राचार्य डॉ प्रो उषा कुमारी, अधीक्षक डॉ विनोद कुमार सिंह व जूनियर रेजिडेंट शामिल थे. दूसरे दिन भी टीकाकरण रहा बंद पटना . गर्दनीबाग अस्पताल में कोलकाता में डॉक्टर से रेप व हत्या के विरोध में दूसरे दिन बच्चों के टीकाकरण काे बंद कर दिया गया. वहीं, एलएनजेपी हड्डी अस्पताल में डॉक्टरों व नर्सों ने काला पट्टा लगा प्रदर्शन किया. पूरे दिन ओपीडी बंद रखा गया. गया. राजेंद्र नगर नेत्रालय में शनिवार को ओपीडी बंद रखा गया. गार्डिनर रोड अस्पताल में भी ओपीडी सेवा को बंद रखा गया.

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