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Home बिहार पटना डिजिटल तकनीक से महिलाओं, आदिवासियों और दूर-दराज के इलाकों के छात्रों को मिलेगा समान अवसर

डिजिटल तकनीक से महिलाओं, आदिवासियों और दूर-दराज के इलाकों के छात्रों को मिलेगा समान अवसर

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डिजिटल तकनीक से महिलाओं, आदिवासियों और दूर-दराज के इलाकों के छात्रों को मिलेगा समान अवसर

-एकेयू पटना में पूर्वी क्षेत्र के कुलपतियों की दो दिवसीय बैठक संपन्न

-डिजिटल तकनीक से शिक्षा को टिकाऊ और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर

संवाददाता, पटना

आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (एकेयू) में एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआइयू) की ओर से पूर्वी क्षेत्र कुलपतियों की दो दिवसीय बैठक 2025-26 का मंगलवार को समापन हुआ. यह बैठक उच्च शिक्षा संस्थानों में सतत विकास और सामाजिक जिम्मेदारी विषय पर केंद्रित रही. समापन सत्र के मुख्य अतिथि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष गिरीश चौधरी ने कहा कि बैठक की असली सफलता तभी होगी, जब विशेषज्ञों के सुझाव जमीन पर उतरेंगे. बैठक के अंतिम दिन ‘सतत विकास के लिए भविष्य की डिजिटल और तकनीकी राहें’ विषय पर तकनीकी सत्र का आयोजन हुआ. सत्र की अध्यक्षता एकेयू के कुलपति प्रो शरद कुमार यादव ने किया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सतत विकास लक्ष्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इस सत्र में डॉ के रुक्मणी, डॉ बशीरहामद शादरक और आइआइआइटी अगरतला के प्रो अभय कुमार ने अपने विचार रखे. वक्ताओं ने कहा कि डिजिटल तकनीक शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकती है. इससे सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाया जा सकता है. वक्ताओं ने बताया कि डिजिटल शिक्षा से डिजिटल रूप से सक्षम ग्रेजुएट्स तैयार होंगे. यह तकनीक महिलाओं, आदिवासियों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए समान अवसर उपलब्ध करायेगी. आइआइटी बॉम्बे के डिजिटल एजुकेशन मॉडल और आइआइटी मद्रास की ऑनलाइन बीएससी डिग्री को सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया.

शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और पहुंच सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है:

सत्र में कहा गया कि ब्लेंडेड लर्निंग, वर्चुअल लैब्स और डिजिटल ट्विन्स शिक्षा को अधिक समावेशी बनायेंगे. साथ ही नेटफ, दीक्षा, स्वयं और वर्चुअल लैब्स जैसी सरकारी पहलें इस बदलाव की मजबूत नींव हैं. वक्ताओं ने यह भी चिंता जतायी कि आज की रोजगार क्षमता में कमी केवल तकनीकी कौशल की नहीं, बल्कि उद्यमशील सोच और अनुकूलन क्षमता की भी है. एआइयू के अध्यक्ष प्रो विनय कुमार पाठक ने कहा कि शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और पहुंच सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने मेक इन इंडिया और विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया. एआइयू की महासचिव पंकज मित्तल ने कहा कि एआइयू 1925 से देश की प्रमुख उच्च शिक्षा संस्था है और इससे 1175 विश्वविद्यालय जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि एआइयू सरकार और विश्वविद्यालयों के बीच सेतु का काम करता है.

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की ओर बढ़ने की जरूरत

सीआइएमपी पटना के निदेशक डॉ राणा सिंह ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत विदेशी छात्रों को आकर्षित करें. उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय की परंपरा को पुनर्जीवित करने की बात कही. इस अवसर पर बिहार खेल विश्वविद्यालय, मिजोरम विश्वविद्यालय और रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, असम को श्रेष्ठ कार्यप्रणाली पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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