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Home बिहार पटना दीपक प्रकाश को लेकर बढ़ा सस्पेंस, क्या नवंबर से पहले बन पाएंगे सदन का सदस्य?

दीपक प्रकाश को लेकर बढ़ा सस्पेंस, क्या नवंबर से पहले बन पाएंगे सदन का सदस्य?

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दीपक प्रकाश को लेकर बढ़ा सस्पेंस, क्या नवंबर से पहले बन पाएंगे सदन का सदस्य?
दीपक प्रकाश की फाइल फोटो

Deepak Prakash: बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए ने अपने सभी नौ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. उम्मीदवारों की सूची में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को जगह नहीं मिली है. इसके बाद उनके मंत्री पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में उनके सामने मंत्री पद पर बने रहने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. आने वाले समय में भी ऐसा कोई चुनाव नहीं दिख रहा है, जिसके जरिए वे जल्द किसी सदन के सदस्य बन सकें.

विधान परिषद चुनाव में नहीं मिली जगह

बिहार विधानसभा कोटे से विधान परिषद की 10 सीटों पर चुनाव होना है. इनमें नौ सीटों पर नियमित द्विवार्षिक चुनाव हो रहा है, जबकि एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट महागठबंधन के खाते में जाती दिख रही है.

एनडीए ने अपने सभी नौ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं. इसके बाद गठबंधन के भीतर किसी अन्य दल के लिए अतिरिक्त सीट की संभावना लगभग खत्म हो गई है. सभी एनडीए उम्मीदवार सोमवार को नामांकन दाखिल करेंगे.

छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना जरूरी

संविधान और नियमों के अनुसार कोई व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने मंत्री तो बन सकता है, लेकिन उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है. दीपक प्रकाश पहले भी मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उस दौरान सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया था. इसके बाद मई 2026 में वे रालोमो कोटे से फिर मंत्री बने. उस समय भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे. राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि उन्हें विधान परिषद चुनाव में एनडीए की ओर से उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

क्या मंत्री पद बचाना मुश्किल

नियमों के मुताबिक दीपक प्रकाश तय समय सीमा के भीतर किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा. मंत्री पद बरकरार रखने के लिए उन्हें 7 नवंबर 2026 से पहले किसी सदन की सदस्यता हासिल करना होगा. मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह आसान नहीं लग रहा है, क्योंकि फिलहाल ऐसा कोई चुनाव सामने नहीं है जिससे वे सदन तक पहुंच सकें.

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क्या बोले उपेंद्र कुशवाहा

लोजपा (रा) द्वारा अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद भी राष्ट्रीय लोक मोर्चा की ओर से उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा रही है. दीपक प्रकाश की उम्मीदवारी से जुड़े सवाल पर उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि उनकी एनडीए के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत चल रही है. उन्होंने कहा कि नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने में अभी समय है, इसलिए फिलहाल इंतजार करना चाहिए.

विधान परिषद चुनाव में विधानसभा का गणित भी रालोमो के पक्ष में नहीं दिख रहा है. एक उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. एनडीए के पास फिलहाल 201 विधायक हैं. इस हिसाब से गठबंधन के आठ उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं, जबकि नौवें उम्मीदवार के लिए भी पर्याप्त समर्थन मौजूद है.

रालोमो के पास केवल 4 विधायक हैं. हम के पास 5 विधायक और लोजपा (रा) के पास 19 विधायक हैं. ऐसे में गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे में रालोमो की दावेदारी कमजोर पड़ गई.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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