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Home बिहार पटना चीन व दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित साइबर गिरोहों से चुनावी सुरक्षा को खतरा

चीन व दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित साइबर गिरोहों से चुनावी सुरक्षा को खतरा

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चीन व दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित साइबर गिरोहों से चुनावी सुरक्षा को खतरा

एडीजी इओयू के नेतृत्व में देशी- विदेशी स्रोतों से संचालित साबर अपराधियों के गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की रणनीति बन रही

अनुज शर्मा, पटना

चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया से संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को गंभीर चुनौती मिल सकती है. ये गिरोह बिहार समेत कई राज्यों में वॉइस ओवर इंटरनेट कॉल, डिजिटल गिरफ्तारी का भ्रम और आभासी मुद्रा में लेन-देन के जरिए आम नागरिकों को ठगने और भ्रमित करने की साजिश रच सकते हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अपर पुलिस महानिदेशक नैयर हसनैन खान ने टेलीकॉम कंपनियों और आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों को इससे आगाह करते हुए कड़ी निगरानी और सुरक्षा के उपाय करने के आदेश दिये हैं. देशी-विदेशी स्रोतों से संचालित इन गिरोहों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग से कार्रवाई की रणनीति भी तैयार की जा रही है. इओयू ने सिम बाक्स मामले की जांच में पाया है सिम बॉक्स के लिए सैकड़ों सिम कार्ड विभिन्न टेलीकॉम कंपनी से जुड़े उपलब्ध करा रहे हैं. अपराधी को दो से तीन यूज करने के बाद नये सिमकार्ड हासिल कर रहे हैं.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इओयू को इनपुट मिला है कि साइबर अपराधियों की गतिविधियां न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है. केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में राज्य सरकारों को निर्देशित किया गया कि वे इन खतरों के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतें. साथ ही साइबर निगरानी, तकनीकी विशेषज्ञता और आम नागरिकों में जागरूकता के लिए त्वरित कदम उठाएं. बैठक में यह भी कहा गया कि कई मामलों में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वॉइस कॉल के जरिये लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और उनसे आभासी मुद्रा (क्रिप्टो) में पैसा वसूला गया.विशेषज्ञों का मानना है कि ये साइबर हमले न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का प्रयास भी हो सकते हैं. केंद्र सरकार की इस एडवाइजरी के आधार पर इओयू अपने साइबर थानों की क्षमता बढ़ाने और आवश्यक तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने में जुटी है.

सक्रिय ठगी मॉड्यूल चिह्नित

सूत्र बताते हैं कि इओयू ने कई ऐसे सक्रिय ठगी मॉड्यूल चिह्नित किये गये हैं जो राज्य में सस्ते इंटरनेट यंत्रों और फर्जी जैविक पहचान (बायोमेट्रिक) के जरिये सक्रिय हैं. पुलिस अधीक्षक साइबर अनुसंधान एवं अभियान विनय तिवारी द्वारा दो दिन पहले एक उच्चस्तरीय बैठक में तकनीकी प्रस्तुति में बताया था कि सिम कार्ड की थोक आपूर्ति और प्रमाणन की खामियों का अपराधी फायदा उठा रहे हैं. सुपौल में उजागर हुए अंतरराष्ट्रीय सिम बाक्स का उल्लेख किया, जिसमें विदेशी साइबर एजेंट्स, अवैध सीम कार्ड आपूतिकर्ता नेटवर्क और चीनी, दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों के नेटवर्क की संलिप्तता सामने आयी है. —-वर्जन———-

साइबर अपराध के विरुद्ध लड़ाई में पुलिस, डीओटी एवं दूरसंचार सेवा प्रदाता कम्पनियों के बीच सशक्त भागीदारी ही सफलता की कुंजी है. सतत सहयोग, निगरानी, त्वरित कार्रवाई, तथा सभी स्तरों पर जागरूकता अभियान की आवश्यकत्ता से ही साइबर अपरोध को रोकने में मदद मिलेगी.

संजय कुमार, डीआइजी साइबर, इओयूB

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