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CNLU एआइ की मदद से कानून प्रवर्तन प्रक्रिया में लायेगा बदलाव

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CNLU एआइ की मदद से कानून प्रवर्तन प्रक्रिया में लायेगा बदलाव

सीएनएलू का ग्रेविटास एआइ और ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज के साथ हुआ एमओयू

संवाददाता, पटना

चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (सीएनएलयू) ने एआइ के मदद से कानून प्रवर्तन प्रक्रिया में नव बदलावों के उद्देश्य से लंदन स्थित ग्रेविटास एआइ लिमिटेड एआइ कंपनी और ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है. समझौता ज्ञापन एमओयू पर हैदराबाद में सीएनएलयू के कुलपति प्रोफेसर फैजान मुस्तफा की उपस्थिति में ग्रेविटास एआइ के सह-संस्थापक मुकेश सिन्हा और ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज के सीइओ वामशी श्रीनिवास रघु राम रेड्डी कोथा ने ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज पर हस्ताक्षर किया. यह पहल कानून प्रवर्तन प्रक्रियाओं में अत्याधुनिक एआइ प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने का प्रयास करती है, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों, वकीलों, कानूनी पेशेवरों और आम जनता को लाभ मिलता है. सीएनएलयू के कुलपति प्रो फैजान मुस्तफा ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को प्रभावशाली ढंग से उपयोग करने में पथप्रदर्शक पहल साबित होगी. यह कानूनी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और न्याय वितरण को तेज और अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

जटिल कानूनी प्रक्रियाएं होंगी सफल

ग्रेविटास एआइ के सह-संस्थापक मुकेश सिन्हा ने हम इस क्रांतिकारी परियोजना पर प्रतिष्ठित सीएनएलयू और ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज के साथ सहयोग करके रोमांचित हैं. हमारी एआइ विशेषज्ञता कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने और पूरे भारत में लाखों लोगों के लिए जानकारी तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक उपकरण बनाने में मदद करेगी. ट्राइकुलिन टेक्नोलॉजीज के सीइओ वामशी श्रीनिवास ने कहा कि कानूनी प्रक्रियाओं में उन्नत एआइ समाधानों का एकीकरण न केवल जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनायेगा बल्कि केस बैकलॉग को कम करने में भी सार्थक योगदान देगा. परियोजना का लक्ष्य भारतीय कानून प्रवर्तन प्रक्रिया की अनूठी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार एआइ उपकरण विकसित करना है. यह सहयोग कानून कार्यान्वयन क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में एक बड़ी छलांग का प्रतीक है.

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