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Home बिहार पटना सस्पेंस खत्म, दीपक प्रकाश पर भाजपा की मुहर, अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर टिकी नजरें

सस्पेंस खत्म, दीपक प्रकाश पर भाजपा की मुहर, अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर टिकी नजरें

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सस्पेंस खत्म, दीपक प्रकाश पर भाजपा की मुहर, अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम पर टिकी नजरें
दीपक प्रकाश

Deepak Prakash: बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश फिलहाल किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. विधान परिषद चुनाव में टिकट न मिलने के बाद उनके पद पर संशय था, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि दीपक प्रकाश आज भी मंत्री हैं और आगे भी पद पर बने रहेंगे. नियम के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना सदस्य रहे 5 महीने और 29 दिनों तक मंत्री रह सकता है. दीपक प्रकाश ने 7 मई को शपथ ली थी, इसलिए वह नवंबर के पहले हफ्ते तक बिना विधायक या एमएलसी बने कैबिनेट में रह सकते हैं.

राज्यसभा चुनाव के बाद बदला समीकरण, नहीं मिला एमएलसी का टिकट

उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीद थी कि 2025 के विधानसभा चुनाव के सीट बंटवारे के वादे के तहत बीजेपी उनके बेटे दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बीजेपी नेताओं के अनुसार, इस बीच हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के समर्थन से उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा राज्यसभा भेजा गया, जिससे समीकरण बदल गए. सियासी गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी ने दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के लिए रालोमो के विलय का ऑफर दिया था. इसे उपेंद्र कुशवाहा ने खारिज कर दिया था.

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उपेंद्र कुशवाहा के पास कई विकल्प

मंत्री पद बचाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा के पास कई विकल्प मौजूद हैं. बिहार विधानसभा में इस समय रालोमो के पास 4 विधायक हैं, जिनमें उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी शामिल हैं. दीपक प्रकाश का पद सुरक्षित रखने के लिए पहला रास्ता यह है कि उनके इस्तीफा देने पर उनकी जगह पत्नी स्नेहलता या पार्टी के नेता माधव आनंद को कैबिनेट में शामिल करा दिया जाए.

दूसरा विकल्प यह है कि सासाराम से विधायक स्नेहलता की सीट खाली कराकर दीपक प्रकाश को वहां से विधानसभा का उपचुनाव लड़वाया जाए. इसके अलावा, अक्टूबर से पहले होने वाले पटना की बांकीपुर सीट के उपचुनाव में भी दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. अंतिम रास्ता यह है कि नवंबर में खाली हो रही विधान परिषद की शिक्षक या स्नातक क्षेत्र की सीटों पर दीपक प्रकाश को चुनाव लड़वाकर सदन में भेजा जाए.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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