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Home बिहार पटना वाराणसी-कोलकाता 6-लेन हाईवे को मिली रफ्तार, गया में पत्थर कटाई के लिए लगेंगे 3 बड़े क्रशर

वाराणसी-कोलकाता 6-लेन हाईवे को मिली रफ्तार, गया में पत्थर कटाई के लिए लगेंगे 3 बड़े क्रशर

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वाराणसी-कोलकाता 6-लेन हाईवे को मिली रफ्तार, गया में पत्थर कटाई के लिए लगेंगे 3 बड़े क्रशर
सांकेतिक फोटो

Varanasi Kolkata Six Lane: वाराणसी-रांची-कोलकाता के बीच बन रहे 6-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे के निर्माण को लेकर बिहार सरकार के खान एवं भू-तत्व विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है. गया जिले में इस हाईवे के करीब 33 किलोमीटर लंबे हिस्से का काम होना है. यह पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरेगा. इस ऊबड़-खाबड़ रास्ते को सुगम बनाने के लिए सरकार ने गया के ग्राम अनरबंसेलिया से संग्रामपुर तक के इलाके में हार्ड रॉक की कटाई और उन्हें पीसने के लिए तीन क्रशर मशीनें लगाने की अनुमति दे दी है.

दो तरह के क्रशर होंगे

यह जिम्मेदारी कोलकाता की कंपनी मेसर्स जीआर वाराणसी कोलकाता हाईवे प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है. विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, कंपनी अगले तीन वर्षों तक इन क्रशरों का संचालन कर सकेगी.

इनमें से दो क्रशर एक जगह स्थाई रूप से लगे रहेंगे, जबकि एक मोबाइल क्रशर होगा जिसे जरूरत के हिसाब से कहीं भी ले जाया जा सकेगा. सरकार का कहना कि पत्थरों की लोकल स्तर पर क्रशिंग होने से बाहर से गिट्टी मंगाने का झंझट खत्म होगा. इससे समय और पैसा दोनों बचेंगे.

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कड़े नियम भी लागू

कंपनी को छूट देने के साथ-साथ कड़े नियम भी लागू किए गए हैं. कंपनी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह काम शुरू करने से पहले प्रदूषण बोर्ड और अन्य विभागों से जरूरी एनओसी हासिल करे. इस पूरे काम की रेगुलर देख-रेख भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा की जाएगी. NHAI यह देखेगा कि कंपनी नियमों का पालन कर रही है या नहीं और इसकी रिपोर्ट सीधे गया के डीएम को दी जाएगी.

हाईवे निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कंपनी को हर दिन का हिसाब-किताब एक रजिस्टर में दर्ज करना होगा. इसे अधिकारी कभी भी चेक कर सकते हैं. इस 6-लेन हाईवे के तैयार हो जाने से न केवल बिहार, झारखंड और बंगाल के बीच सफर आसान हो जाएगा, बल्कि इस पूरे इलाके में व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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