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Home बिहार पटना देश की सबसे पुरानी पार्टी का बिहार में गिर रहा ग्राफ, गुटबाजी हावी, क्या कर रहा हाईकमान

देश की सबसे पुरानी पार्टी का बिहार में गिर रहा ग्राफ, गुटबाजी हावी, क्या कर रहा हाईकमान

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देश की सबसे पुरानी पार्टी का बिहार में गिर रहा ग्राफ, गुटबाजी हावी, क्या कर रहा हाईकमान
राजेश राम और राहुल गांधी

Bihar Congress: बिहार की राजनीति में कभी बादशाहत रखने वाली कांग्रेस आज अपने ही घर में लगी आग बुझाने में नाकाम दिख रही है. पार्टी के भीतर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि नेता और कार्यकर्ता अब भविष्य को लेकर डरे हुए हैं. विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद केवल 19 सीटें ही जीत पाई थी. इस खराब स्ट्राइक रेट ने महागठबंधन की सरकार बनने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था. 2025 के विधानसभा चुनाव में स्थिति और खराब हो गई. पार्टी का प्रदर्शन पहले से भी कमजोर रहा और 6 सीटों पर सिमट गईं. इससे पता चलता है कि पार्टी का जनाधार लगातार सिमट रहा है.

फिलहाल पार्टी का क्या है हाल

बिहार कांग्रेस दो फाड़ हो चुकी है. एक गुट वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी के साथ खड़ा है, तो दूसरा गुट उन्हें हटाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है. हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में जिस तरह विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाया, उसने साफ कर दिया कि नेतृत्व पर किसी का नियंत्रण नहीं रह गया है. एक खेमा अब खुलकर हाईकमान का दरवाजे खटखटा रहा है ताकि जल्द से जल्द नया चेहरा सामने लाया जा सके और पार्टी मजबूत हो.

हाईकमान का ध्यान कहां है?

अभी बिहार कांग्रेस को हाईकमान के साथ की जरूरत है लेकिन उनका पूरा फोकस पश्चिम बंगाल और असम पर है. बिहार पर बिल्कुल ध्यान नहीं है. इस उपेक्षा के कारण जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का उत्साह पूरी तरह खत्म हो गया है.

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स्थिति और बदतर हो सकती है

ऐसे समय में कांग्रेस ने तुरंत अपनी आंतरिक गुटबाजी खत्म नहीं की और एक मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाला नेतृत्व नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में स्थिति 2025 और 2020 से भी बदतर हो सकती है. पार्टी को केवल गठबंधन के भरोसे रहने के बजाय अपनी जमीन तलाशनी होगी. वरना, बिहार जैसे राज्य में कांग्रेस महज एक वोट कटवा या छोटे सहयोगी दल के रूप में सिमट कर रह जाएगी.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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