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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब SLET करना होगा पास, बहाली के बदले नियम

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए अब SLET करना होगा पास, बहाली के बदले नियम
BSUSC ने बहाली के बदले नियम

Bihar Assistant Professor SLET Exam, अनुराग प्रधान: बिहार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से पहले अब स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट (SLET) आयोजित किया जायेगा. इस परीक्षा को पास करने वाले अभ्यर्थी ही आगे असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे.

राज्य सरकार उच्च शिक्षा में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करने के मकसद से यह व्यवस्था लागू करने जा रही है. इसका ड्राफ्ट बिहार लोकभवन ने जारी किया है. लोकभवन से जारी ड्राफ्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह परीक्षा यूजीसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) की तर्ज पर आयोजित की जायेगी.

राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और विषय ज्ञान का मूल्यांकन किया जायेगा. एसएलइटी लागू होने से राज्य के विश्वविद्यालयों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी और भर्ती के लिए एक समान मानक स्थापित हो सकेगा.

कुछ मामले में मिल सकती है छूट

बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए नया ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 के प्रस्तावित नियमों के अनुसार विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थियों को यूजीसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) या राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा (स्लेट) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा. यह परीक्षा बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के साथ लागू होगी.

पात्रता परीक्षा पास करने के बाद ही असिस्टेंट प्रोफेसर के बहाली के लिए आयोजित परीक्षा में बैठ सकते हैं. ड्राफ्ट तैयार करने वाले एक कुलपति ने कहा कि मसौदे के अनुसार जिन अभ्यर्थियों के पास यूजीसी के नियमानुसार संबंधित विषय में पीएचडी की डिग्री है, उन्हें नेट व स्लेट से छूट दी जा सकती है. इसके लिए पीएचडी नियमित मोड में होनी चाहिए और शोध प्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी परीक्षकों द्वारा किया गया हो. साथ ही उम्मीदवार की मौखिक परीक्षा होनी आवश्यक है.

इसके अलावा पीएचडी के दौरान अभ्यर्थी को अपने रिसर्च से संबंधित कम से कम दो रिसर्च पेपर प्रकाशित करने होंगे, जिनमें से एक मान्यता प्राप्त जर्नल में होना जरूरी है. साथ ही दो शोध पत्र यूजीसी, आइसीएसएसआर या सीएसआइआर जैसे संस्थानों द्वारा प्रायोजित सेमिनार या कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत करना होगा. मसौदे में यह भी प्रावधान है कि जिन विषयों में यूजीसी द्वारा नेट या स्लेट आयोजित नहीं किया जाता, उन विषयों के लिए यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी.

विदेश के टॉप- 500 विश्वविद्यालयों से पीएचडी प्राप्त अभ्यर्थियों को भी कुछ मामलों में पात्र माना जायेगा. स्टेट लेवल एलिजिबिलिटी टेस्ट (SLET) में संबंधित विषयों में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ पीजी पास होना आवश्यक होगा. स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संबंधित विषय का अध्ययन होना चाहिए.

अनुभव के लिए नहीं मिलेगा अंक

अनुभव के लिए अलग से कोई अंक नहीं दिया जायेगा और पीएचडी को केवल पात्रता (नेट के समान) माना जा सकता है.

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हिंदी और दर्शनशास्त्र की पात्रता में पीजी के साथ ही ग्रेजुएशन स्तर पर मुख्य विषय होना आवश्यक

बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए तैयार किये गये नये ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 में विभिन्न विषयों की पात्रता को स्पष्ट किया गया है. मसौदे के एनेक्सचर-II में हिंदी और दर्शनशास्त्र विषय के लिए भी पात्रता और समकक्ष विषयों की सूची जारी की गयी है.

मसौदे के अनुसार हिंदी विषय में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए अभ्यर्थी के पास भाषा विज्ञान, तुलनात्मक साहित्य, अनुवाद अध्ययन या लोक साहित्य जैसे विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री हो सकती है. हालांकि इसके लिए यह अनिवार्य शर्त रखी गयी है कि अभ्यर्थी ने स्नातक स्तर पर हिंदी भाषा व साहित्य को मुख्य विषय के रूप में पढ़ा हो.

इसी तरह दर्शनशास्त्र विषय के लिए भी समकक्ष विषयों को शामिल किया गया है. इसके तहत बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन, तुलनात्मक धर्म अध्ययन और योग दर्शन में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन के पात्र होंगे. लेकिन इसके लिए स्नातक स्तर पर दर्शनशास्त्र को मुख्य विषय के रूप में पढ़ना अनिवार्य होगा. ग्रेजुएशन में मुख्य विषय को शामिल करने पर स्टूडेंट्स ने नाराजगी जतायी है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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