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Home बिहार नवादा नवादा: भीषण जल संकट से मेसकौर बेहाल, सूख गईं नदियां; किसान और पशुपालक परेशान

नवादा: भीषण जल संकट से मेसकौर बेहाल, सूख गईं नदियां; किसान और पशुपालक परेशान

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नवादा: भीषण जल संकट से मेसकौर बेहाल, सूख गईं नदियां; किसान और पशुपालक परेशान
पानी के लिए जाते ग्रामीण.

मेसकौर (नवादा) से प्रेम कुमार की रिपोर्ट

Nawada News:  मेसकौर प्रखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने गंभीर जल संकट पैदा कर दिया है। कभी तीन प्रमुख नदियों से समृद्ध माने जाने वाले इस इलाके में अब हालात ऐसे हैं कि जीवनदायिनी तिलैया और ढाढर सहित सभी छोटी-बड़ी बरसाती नदियां समय से पहले पूरी तरह सूख चुकी हैं. नदी के स्थान पर अब केवल सूखी रेत, धूल और दरारों वाली जमीन दिखाई दे रही है.

स्थानीय लोगों के अनुसार स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और इसका सीधा असर खेती, पशुपालन और भू-जल स्तर पर पड़ रहा है.

सिंचाई सबमर्सिबल पर निर्भर, खेती पर संकट

किसानों का कहना है कि पहले जून-जुलाई में अच्छी बारिश के बाद नदियां भर जाती थीं और खरीफ फसलों की सिंचाई आसान हो जाती थी. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बारिश का पैटर्न बदल गया है. अब सिंचाई पूरी तरह सबमर्सिबल मोटर और बिजली पर निर्भर हो गई है.

क्षेत्र का औसत भू-जल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है और अब यह 46 फीट से भी अधिक गहराई तक पहुंच चुका है.

गाद और अतिक्रमण से बिगड़ी स्थिति

किसानों के अनुसार नदियों की सतह पर जमी गाद और अतिक्रमण के कारण जल प्रवाह बाधित हो गया है. बारिश होने पर भी पानी रुक नहीं पाता और तेजी से बह जाता है, जिससे नदी में ठहराव नहीं हो पाता. नतीजतन दिसंबर-जनवरी तक ही नदियां पूरी तरह सूख जा रही हैं.

पशुपालन और ग्रामीण जीवन प्रभावित

नदी किनारे बसे गांवों में पशुओं के लिए पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. पहले सूखी नदी में बने गड्ढों से भी पानी मिल जाता था, जिससे मवेशियों की प्यास बुझाई जाती थी और घरेलू उपयोग होता था. लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि ऐसे स्रोत भी पूरी तरह खत्म हो चुके हैं.

लोगों की जुबानी हालात

लाखोरा गांव सहित आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि पहले आठ महीने तक नदियों में पानी रहता था, लेकिन अब यह अवधि घटकर मुश्किल से चार महीने रह गई है. कई जगह तो नदी में कुंड खोदने पर भी पानी नहीं निकल रहा है.

झारखंड से जुड़ा जल स्रोत, लेकिन जंगलों पर संकट

विशेषज्ञों के अनुसार मेसकौर क्षेत्र की नदियां वर्षा आधारित हैं और इनका जल स्रोत झारखंड के कोडरमा के जंगलों से जुड़ा है. लेकिन वनों की कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण वर्षा चक्र प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर इन नदियों पर पड़ रहा है.

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राजीव कुमार कंटेंट राइटर राजीव कुमार प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं. खबरों के संपादन के क्षेत्र में उनके पास तीन साल का अनुभव है. प्रभात खबर डिजिटल के पटना कार्यालय से जुड़ने से पहले वे भागलपुर में हिंदुस्तान और दैनिक भास्कर अखबार की संपादकीय टीम में काम कर चुके हैं. बिहार की राजनीतिक, सामाजिक जीवन से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ रखते हैं. विशेषज्ञता राजीव कुमार खास तौर पर राजनीति की खबर,ब्रेकिंग न्यूज, रियल टाइम खबरें और मौसम की खबर समेत रिसर्च आधारित खबरें करते हैं. इसके अलावा वह हर तरह के इवेंट का पल-पल का लाइव कवरेज भी करते हैं. सोशल मीडिया एक्स हैंडल पर नजर बनाएं रखते है. खासकर राजनीति से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस रखते है. बिहार की राजनीति पर हमेशा नजर रहती है. पत्रकारिता अनुभव राजीव कुमार ने पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज,खबर की थीम,खबरों में तथ्य आदि के बारे में बारीकी से समझा. करीब एक साल तक हिंदुस्तान अखबार में काम करने बाद दैनिक भास्कर में काम करने का मौका मिला.दैनिक भास्कर में जिले से जुड़ी खबर, लोकल खबर समेत कई खबरों की जानकारी मिली.करीब दो साल तक दैनिक भास्कर में काम करने के बाद प्रभात खबर डिजिटल में पारी की शुरुआत की. शिक्षा/पुरस्कार मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण के बाबा सोमेश्वरनाथ नगरी रहने वाले राजीव कुमार ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में पारास्नातक की डिग्री हासिल किया. दैनिक भास्कर में काम करने के दौरान बेतहर हेडिंग और एनओडी पैकेज पर दो-दो पुरस्कार प्राप्त है.
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