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Home बिहार नवादा अब हर मंगलवार को ककोलत जलप्रपात रहेगा बंद

अब हर मंगलवार को ककोलत जलप्रपात रहेगा बंद

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अब हर मंगलवार को ककोलत जलप्रपात रहेगा बंद

ककोलत जलप्रपात 15 मार्च से खुला, सैलानियों की बढ़ी भीड़ गर्मी बढ़ने के साथ पर्यटकों का रुझान बढ़ा प्रतिनिधि, गोविंदपुर. प्रखंड अंतर्गत थाली थाना क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ककोलत शीतल जलप्रपात को 15 मार्च से पूरी तरह खोल दिया गया है. इसके बाद से यहां प्रतिदिन सैलानियों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ रही है. गर्मी बढ़ने के साथ ही ठंडे पानी के इस झरने में स्नान करने और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं. पूर्व व्यवस्था के अनुसार, अब बुधवार की जगह प्रत्येक मंगलवार को ककोलत जलप्रपात पूरी तरह बंद रहता है. इस दिन पर्यटकों का प्रवेश वर्जित रहता है, जबकि अन्य दिनों में सामान्य रूप से आवाजाही जारी रहती है. बताया जाता है कि शादी-विवाह के लग्न के समय पर्यटकों की संख्या में कुछ कमी देखी गयी थी, लेकिन लग्न समाप्त होते ही पर्यटकों का आना सामान्य हो गया है. अप्रैल से मई के बीच बेमौसम कई बार मूसलाधार बारिश हुई है, लेकिन अब तक बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है. इसके कारण ककोलत को बंद करना पड़ा. हालांकि, इससे निबटने के लिए वरीय पदाधिकारियों की ओर से आवश्यक तैयारी का दावा किया गया है, ताकि भविष्य में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न न हो. वन विभाग के डीएफओ श्रेष्ठ कुमार कृष्णा ने पूर्व में बताया था कि पिछले वर्ष आयी बाढ़ से ककोलत क्षेत्र को काफी नुकसान पहुंचा था. बाढ़ के कारण जलप्रपात और आसपास के ढांचे में कई बदलाव हुए थे. अब सभी आवश्यक मरम्मत और सुधार कार्य पूरे कर लिये गये हैं, जिससे पर्यटकों को पहले से बेहतर सुविधाएं मिल सके. उन्होंने बताया कि ककोलत के रास्तों और परिसर को विकसित कर ‘पार्क’ का रूप देने की योजना है, ताकि सैलानियों को बैठने, आराम करने और समय बिताने के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सके. लक्ष्य है कि ककोलत को एक मानक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये. बाढ़ से निबटने के लिए चल रहा काम डीएफओ ने कहा कि हर साल आने वाली बाढ़ से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है. इसे देखते हुए विभाग इस दिशा में काम कर रहा है कि भविष्य में बाढ़ की स्थिति को रोका जा सके. प्रयास यह है कि सालभर ककोलत में पर्यटकों का आना जारी रहे और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत हो. पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नयी व्यवस्था बनायी जायेगी. भारी बारिश या जलप्रवाह बढ़ने की स्थिति में ऊपरी कुंड को बंद किया जायेगा, जबकि निचला कुंड हमेशा खुला रहेगा, ताकि आने वाले सैलानी स्नान का आनंद ले सके. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पर्यटक बिना झरने का अनुभव किए वापस नहीं लौटे.

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