[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार नवादा नवादा में शोपीस बने टैबलेट, 90% प्रारंभिक विद्यालयों में नहीं शुरू हुई डिजिटल हाजिरी

नवादा में शोपीस बने टैबलेट, 90% प्रारंभिक विद्यालयों में नहीं शुरू हुई डिजिटल हाजिरी

0
नवादा में शोपीस बने टैबलेट, 90% प्रारंभिक विद्यालयों में नहीं शुरू हुई डिजिटल हाजिरी
प्रखंड संसाधन केंद्र,अकबरपुर

Nawada News: नवादा जिसे के अकबरपुर प्रखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने की योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है. फर्जी हाजिरी पर लगाम लगाने के लिए सभी प्रारंभिक, हाई और इंटर स्कूलों को टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन महीनों बाद भी अधिकांश स्कूलों में बच्चों की डिजिटल हाजिरी शुरू नहीं हो सकी है.

फरवरी में ही जारी हुआ था आदेश

90 फीसदी प्रारंभिक स्कूलों में टैबलेट केवल शो-पीस बनकर रह गये हैं. बीइओ विधानंद कुमार ने बताया कि प्रखंड के 1340 शिक्षकों में से 1281 ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है. वहीं, कुल नामांकित 29,250 बच्चों में से अब तक केवल 10,144 छात्रों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया है. फरवरी 2026 में ही शिक्षकों और छात्रों की टैबलेट से हाजिरी अनिवार्य करने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन अप्रैल में नया सत्र शुरू होने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

हाजिरी न बनने के मुख्य कारण

टैबलेट से दूरी के पीछे कई तकनीकी और व्यावहारिक कारण सामने आ रहे हैं. पहला कारण यह है कि अधिकांश शिक्षक टैबलेट चलाने में सक्षम नहीं हैं और स्कूलों में कंप्यूटर टीचर का अभाव है. दूसरा बड़ा कारण ‘जियो टैगिंग’ माना जा रहा है. टैबलेट से हाजिरी बनाने के लिए स्कूल परिसर में होना अनिवार्य है, जबकि मोबाइल ऐप के जरिए कई शिक्षक बिना स्कूल पहुंचे भी उपस्थिति दर्ज करने का खेल खेल रहे हैं. इसी पारदर्शिता के डर से हाईटेक व्यवस्था को लागू करने में देरी की जा रही है.

Also read:सीतामढ़ी के रास्ते चलेंगी अमृतसर और दिल्ली की ट्रेनें, रेलवे ने जारी किया नया रूट मैप

Previous article बिना गॉडफादर बॉलीवुड में बनाई पहचान, आज साउथ से हिंदी सिनेमा तक छाई हैं अदा शर्मा
Next article Shahar Mein Aaj: डायट छतौनी में शिक्षकों का पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आज से शुरू
Avatar Of Nikhil Anurag
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel