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Home बिहार नवादा नवादा का संकट मोचन मंदिर: 1979 में बनारस से आई थी प्रतिमा, जानें खाई से भव्य शिखर तक का पूरा इतिहास

नवादा का संकट मोचन मंदिर: 1979 में बनारस से आई थी प्रतिमा, जानें खाई से भव्य शिखर तक का पूरा इतिहास

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नवादा का संकट मोचन मंदिर: 1979 में बनारस से आई थी प्रतिमा, जानें खाई से भव्य शिखर तक का पूरा इतिहास
मंदिर.

NAWADA NEWS: नवादा(मनोज कुमार): शाम 06:00 बजे से : संकट मोचन मंदिर में महाआरती. संकट मोचन मंदिर जिले का शायद ही कोई ऐसा हो जो इस मंदिर को नहीं जानता हो. संकट मोचन हनुमान का यह मंदिर पिछले कई दशकों से लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. कोई शुभ कार्य हो नई गाड़ी खरीदी हो या चुनाव में नॉमिनेशन करवाया हो. लोग पहले संकट मोचन के दरबार में ही माथा टेक कर अपना काम शुरू करते हैं. मंगलवार और शनिवार को मेले सा नजारा होता है. रामनवमी के दिन तो क्या कहना. श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है. लाखों लोगों की आस्था का केंद्र संकट मोचन मंदिर में मौजूद हनुमान की प्रतिमा करीब 47 साल पहले स्थापित की गई थी. जब प्रतिमा स्थापित की गई थी तू यहां सुनसान था. सड़क से काफी नीचे खाई नुमा जगह पर प्रतिमा स्थापित की गई थी.

संकटमोचन मंदिर का पुराना है इतिहास

काफी दिन तक प्रतिमा खुले में ही विराजमान रही. इसके बाद महाबली हनुमान के भक्तों का कारवां बनता चला गया और फिलहाल नवादा शहर में सबसे बड़े आस्था का केंद्र बन गया है. हर सप्ताह 10,000 से अधिक लोग संकट मोचन मंदिर पहुंचते हैं. महंत नकुल दास उदासीन और पुजारी नारायण देव उदासीन की अगुवाई में हर दिन हजारों लोग पूजा अर्चना करते हैं. यूं तो यहां हर रोज श्रद्धालु संकटमोचन के सामने माथा टेकते हैं लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां का नजारा देखते बनता है. हर बार तकरीबन 2 से ढाई हजार श्रद्धालु यहां आते हैं. संकट मोचन मंदिर से सटा हुआ लक्ष्मी नारायण मंदिर भी बनकर तैयार हुआ है.

1979 में बनारस से लाकर स्थापित की गई थी प्रतिमा

संकटमोचन मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि इस मंदिर की स्थापना 1979 में हुई थी. तब बाबा निरंकार दास जी ने इसकी नींव रखी थी. उन्होंने ही काफी समय तक पूजा अर्चना किया. तब बनारस के प्रसिद्ध नाटी इमली से तब हनुमान जी की 5 फूट उंची प्रतिमा लायी गई थी. आज भी उसी सुंदर से प्रतिमा स्वरूप में विराजमान हनुमान जी का दर्शन करने के लिए हजारों की भीड़ यहां उमड़ती है.

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