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Home बिहार नवादा नवादा में मौत के मुहाने पर मरीज! अकबरपुर के 30 से अधिक निजी क्लीनिकों में फायर सेफ्टी शून्य, CHC में जंग खा रहे उपकरण

नवादा में मौत के मुहाने पर मरीज! अकबरपुर के 30 से अधिक निजी क्लीनिकों में फायर सेफ्टी शून्य, CHC में जंग खा रहे उपकरण

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नवादा में मौत के मुहाने पर मरीज! अकबरपुर के 30 से अधिक निजी क्लीनिकों में फायर सेफ्टी शून्य, CHC में जंग खा रहे उपकरण
नवादा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

Nawada News (अनिल कुमार): बिहार के नवादा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आ रही है. अकबरपुर प्रखंड में संचालित निजी क्लीनिक और अस्पताल किसी बड़े हादसे (अग्निकांड) को आमंत्रण दे रहे हैं. इलाके में चल रहे निजी क्लीनिकों के पास ‘फायर एंड इमरजेंसी’ विभाग का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) तक मौजूद नहीं है. कागजी कोरम और औपचारिकता पूरी करने के लिए कुछ अस्पतालों ने महज दिखावे के उपकरण टांग रखे हैं. सबसे गंभीर बात यह है कि स्थानीय अग्निशमन विभाग और प्रखंड प्रशासन ने कभी इन क्लीनिकों की जांच करने तक की जहमत नहीं उठाई, जिससे यहाँ भर्ती होने वाले मरीजों की जान सीधे तौर पर खतरे में है.

गली-मोहल्लों में चल रहे 30 से अधिक अवैध क्लीनिक, न आपातकालीन गेट और न अलार्म

स्थानीय इनपुट और पड़ताल के अनुसार, अकेले अकबरपुर प्रखंड में 30 से अधिक ऐसे निजी क्लीनिक हैं, जो सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर तंग गली-मोहल्लों में धड़ल्ले से ऑपरेट हो रहे हैं.

  • वसूली फुल, सुरक्षा गुल: ये डॉक्टर मरीजों से इलाज के नाम पर मोटी रकम तो वसूल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के नाम पर व्यवस्था शून्य है.
  • बिल्डिंग का नक्शा फेल: यदि कभी इन अस्पतालों में अचानक शॉर्ट सर्किट या गैस सिलेंडर फटने से आग लगती है, तो मरीजों को बाहर निकालने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन गेट) या अलार्म सिस्टम तक नहीं लगाया गया है.

अकबरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का भी बुरा हाल, जंग खा रहे सुरक्षा उपकरण

निजी क्लीनिकों की लापरवाही तो जगजाहिर है, लेकिन सरकारी तंत्र का हाल भी कम बदतर नहीं है. अकबरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की सरकारी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के इंतजाम और फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) जगह-जगह लगाए तो गए हैं, लेकिन सही रख-रखाव और मॉनिटरिंग के अभाव में वे पूरी तरह जंग खा चुके हैं. नियमों के मुताबिक समय-समय पर इन उपकरणों को चेक करने के लिए ‘मॉक ड्रिल’ होनी चाहिए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाता. आग लगने की स्थिति में बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकलने का ‘इवेकुएशन प्लान’ तक गायब है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार पदाधिकारी?

इस गंभीर लापरवाही और सुरक्षा से खिलवाड़ के मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), अकबरपुर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा, “किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान की सुरक्षा के लिहाज से अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है. प्राइवेट अस्पतालों द्वारा इसकी खुली अनदेखी करना बेहद चिंताजनक है. इस संबंध में विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.”

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