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Home बिहार नवादा नवादा में मोहर्रम की सातवीं पर शुरू हुई पारंपरिक ‘पैकार’: “या हसन-या हुसैन” की सदाओं से गूंजा शहर

नवादा में मोहर्रम की सातवीं पर शुरू हुई पारंपरिक ‘पैकार’: “या हसन-या हुसैन” की सदाओं से गूंजा शहर

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नवादा में मोहर्रम की सातवीं पर शुरू हुई पारंपरिक ‘पैकार’: “या हसन-या हुसैन” की सदाओं से गूंजा शहर
इमामबडा के पास घूमते पैकार

नवादा से बब्लू कुमार की रिपोर्ट

Nawada Muharram Paikar Tradition News: नवादा जिले से आस्था, त्याग और कड़े धार्मिक अनुशासन से जुड़ी खबर सामने आई है. इस्लामिक कैलेंडर के पहले पवित्र महीने मोहर्रम की सातवीं तारीख से मंगलवार को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक ‘पैकार’ की भव्य शुरुआत हो गई है. कर्बला के महान शहीदों और इमाम हुसैन की याद में बड़ी संख्या में अजादार और श्रद्धालु विभिन्न कड़े धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो रहे हैं. पूरे शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में गूंज रही “या हसन, या हुसैन” की सदाओं के बीच चारों तरफ श्रद्धा, अगाध आस्था और महान त्याग का अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है.

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नवादा में मोहर्रम की सातवीं पर शुरू हुई पारंपरिक ‘पैकार’: "या हसन-या हुसैन" की सदाओं से गूंजा शहर 4

सातवीं से दसवीं मोहर्रम तक नंगे पांव कड़े नियमों का पालन करेंगे श्रद्धालु

स्थानीय धार्मिक कमेटियों से मिली जानकारी के अनुसार, मोहर्रम के दौरान यह विशेष रस्म बेहद कठिन और अनुशासित मानी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सातवीं मोहर्रम से लेकर दसवीं मोहर्रम (यौम-ए-आशूरा) तक पैकार धारण करने वाले लोग विशेष कड़े नियमों और संयम का पालन करते हैं. पैकार पहने अजादार समूहों के रूप में विभिन्न चिन्हित मोहल्लों का भ्रमण करते हैं.

ये श्रद्धालु स्थानीय इमामबाड़ों की पूरी परिक्रमा करते हैं और अंत में कर्बला मैदान पहुंचकर अपनी पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी करते हैं. इस दौरान सबसे खास बात यह है कि सभी श्रद्धालु पूरी तरह नंगे पांव रहते हैं. जून महीने की भीषण गर्मी और तपती सड़कों के बावजूद वे अपनी आस्था के कड़े नियमों के तहत चप्पल-जूते का उपयोग वर्जित रखते हैं.

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आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न होगा पर्व

इस ऐतिहासिक और पवित्र अवसर पर नेशनल इस्लामिक फेस्टिवल फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष नेजाम खान उर्फ कल्लू ने मुख्य मंच से समाज को बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि नवादा जिले में मोहर्रम के सभी कार्यक्रम पूरी तरह से पारंपरिक रीति-रिवाजों और तय धार्मिक विधि-विधान के अनुसार ही गरिमा के साथ संपन्न किए जाएंगे. उन्होंने कड़े शब्दों में याद दिलाया कि यह पर्व दुनिया को त्याग, महान बलिदान और मानवता का सच्चा संदेश देता है.

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प्रशासन और स्थानीय कप्तानों की देखरेख में सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद

शांति समिति की बैठकों के बाद कलेक्ट्रेट और जिला पुलिस कप्तानों ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.

फेडरेशन के अध्यक्ष ने जिले के सभी समुदायों और प्रबुद्ध नागरिकों से कड़े सहयोग की अपील करते हुए कहा कि मोहर्रम का यह पर्व आपसी भाईचारे, शांति और पूर्ण सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा. जिला प्रशासन, पुलिस कप्तानों और स्थानीय वालंटियर्स के आपसी तालमेल से सभी संवेदनशील रूटों पर सुरक्षा बल मुस्तैद कर दिए गए हैं, ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें. इमामबाड़े के पास घूमते पैकारों के दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मुस्तैद रहे.

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