Bihar Panchayat News: (प्रेम कुमार) नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड की तेतरिया पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है. वार्ड संख्या-06 के सदस्य अशोक कुमार की शिकायत पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश जारी किए हैं. संबंधित अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है.
ग्रामसभा और कार्यकारिणी की बैठक नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता अशोक कुमार ने जिला पदाधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी एवं अन्य वरीय अधिकारियों को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि पंचायत में सस्टम एवं 15वें वित्त आयोग मद से संचालित योजनाओं का चयन और क्रियान्वयन सरकारी नियमों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि योजनाओं के चयन से पहले नियमित ग्रामसभा का आयोजन नहीं किया गया और न ही कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर जनप्रतिनिधियों की राय ली गई.
वार्ड सदस्यों को नहीं दी जाती योजनाओं की जानकारी
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंचायत में संचालित कई योजनाओं की जानकारी वार्ड सदस्यों को नहीं दी जाती. योजनाओं का चयन और स्वीकृति सीमित स्तर पर की जा रही है, जिससे जनप्रतिनिधियों की भूमिका प्रभावित हो रही है.
साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी तथा अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगाया गया है.
वित्तीय दस्तावेजों की जांच की मांग
वार्ड सदस्य ने पंचायत के वित्तीय कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने तथा योजनाओं के चयन, स्वीकृति और राशि व्यय से संबंधित सभी दस्तावेजों की समीक्षा कराने की मांग की है. उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच से पूरे मामले के तथ्य सामने आ सकते हैं.
जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने मांगी रिपोर्ट
मामले पर संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) को जांच कर बिंदुवार प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. विभागीय पत्र में कहा गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
जांच रिपोर्ट पर टिकी ग्रामीणों की निगाह
शिकायत और जांच के आदेश के बाद पंचायत क्षेत्र में चर्चा का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है.
वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. वहीं आरोप निराधार पाए जाने पर शिकायत का निस्तारण कर दिया जाएगा.
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