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बीत गया ग्रीटिंग्स का पुराना दौर, अब मोबाइल से शुभाकामना संदेश

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बीत गया ग्रीटिंग्स का पुराना दौर, अब मोबाइल से शुभाकामना संदेश

व्हाटस्अप आने के बाद 2014 से बदल गया शुभकामना का तरीका कई मोबाइल एप से लोग बना रहे अपनी पसंद का हैप्पी न्यू इयर का ग्रीटिंग्स उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर एक समय की बात है, जब शहर में नये साल का स्वागत ग्रीटिंग कार्ड्स की चमक-दमक से होता था. नये साल की शुुरुआत से 15 दिन पहले से ही बाजार रंग-बिरंगे ग्रीटिंग्स से सज जाता था. मोतीझील में ग्रीटिंग्स गैलरी थी, जिसमें खरीदारी के लिये ग्राहकों का तांता लगा रहता था. इसके अलावा मोतीझील के सड़क किनारे ग्रीटिंग्स के स्टॉल भी सजे होते थे. वह दौर था जब लोग अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को ग्रीटिंग्स पोस्ट करते थे या उनके घर जाकर देते थे. एक अपनापन का अहसास होता था, लेकिन बदलते दौर में ग्रीटिंग्स अतीत की यादें भर रह गयी है. वर्ष 2015 के बाद जन्म लेने वाले बच्चों को शायद ग्रीटिंग्स की परंपरा की जानकारी भी नहीं हो. पहले जो ग्रीटिंग्स की दुकान थी, अब वहां कपड़े के दुकान खुल गये हैं और फुटपाथ पर लगने वाली ग्रीटिंग्स की दुकानें शृंगार प्रसाधन सामग्री में तब्दील हो गयी है. एसएमएस की सुविधा से ग्रीटिंग्स में आयी गिरावट समय के साथ बदलाव की शुरुआत 2000 के दशक में हुई. हालांकि उस दौरान मोबाइल फोन सभी लोगों के पास उपलब्ध नहीं थे, लेकिन ग्रीटिंग्स की परंपरा समाप्त होनी शुरू हो गयी. जैसे-जैसे लोगों में मोबाइल की उपलब्धता बढ़ी. ग्रीटिंग्स का बाजार गिरने लगा. लोग मोबाइल से हैप्पी न्यू इयर टाइप कर अपने मित्रों को भेजने लगे. लेकिन शहर के बाजार में वर्ष 2012 तक ग्रीटिंग्स का बाजार चलता रहा. ग्राहकों की संख्या में भले ही कमी हो गयी, लेकिन युवाओं में इसका क्रेज पूरी तरह गया नहीं था. भावपूर्ण पंक्तियों वाले कार्डस लोगों की पसंद में थे. पुरानी बाजार के हिमांशु बताते हैं कि वह दौर था जब हमलोग ग्रीटिंग्स कार्ड खरीदने के लिए दिसंबर की शुरुआत से ही पॉकेट मनी जमा करते थे. नये साल के पहले दिन मित्रों के घर जाकर उन्हें ग्रीटिंग्स देते थे स्मार्ट फोन और इंटरनेट से परंपरा हुई समाप्त देश में स्मार्ट फोन वर्ष 2009 में लांच हुआ, हालांकि व्हाटस्अप फीचर 2010 में शुरू हुआ. लेकिन यह वर्ष 2014 में पॉपुलर हो गया. उस वक्त तक अधिकतर लोगों के पास स्मार्ट फोन भी आ गया. फोन में इंटरनेट की सुविधा मिलने से कई तरह के ग्रीटिंग्स वेबसाइट पर मुफ्त उपलब्ध थे. नये साल पर लोगों ने व्हाट्सअप से ही इमेज वाला शुभकामना संदेश भेजना शुरू किया. इससे ग्रीटिंग्स की खरीदारी में खर्च भी नहीं करना पड़ता था और पलक झपकते रंग-बिरंगे संदेश वाला इमेज लोगों तक पहुंच जाता था. व्हाटस्अप क्रांति से शहर में ग्रीटिंग्स परंपरा पूरी तरह समाप्त हो गयी. अब एप के जरिये बना रहे अपनी पसंद का ग्रीटिंग्स डिजिटल युग में अब कइ मोबाइल एप भी है, जिसके जरिये लोग अपनी पसंद के विभिन्न भाव वाले ग्रीटिंग्स बना कर एक-दूसरे को भेज रहे हैं. यह फीचर कई एप शुल्क लेकर तो कई बिना शुल्क के उपलब्ध करा रहा है. व्हाटस्अप और सोशल मीडिया के उपयोग से नये साल पर इंटरनेट की खपत भी बढ़ जाती है. इन दिनो फाइव जी फोन में अनलिमिटेड इंटरनेट की सुविधा होने के कारण लोगों को एक्स्ट्रा नेट रिचार्ज नहीं कराना पड़ा रहा है, लेकिन फोर जी मोबाइल फोन में डेटा की खपत अधिक हो रही है. बीएसएनएल परिसर में रिचार्ज काउंटर लगाने वाले संतोष कुमार ने कहा कि जिन लोगों की टैरिफ वैलिडिटी समाप्त हो गयी है अब वह अधिक जीबी डेटा वाले प्लान रिचार्ज करा रहे हैं. वर्जन पहले ग्रीटिंग्स का दौर था. लोग नये साल पर ग्रीटिंग्स पोस्ट करते थे. उस दौरान त्वरित सूचना पहुंचाने के लिए लोग टेलीग्राम का सहारा लेते थे. अधिकतर परिवार में कोई घटना होने या किसी खुशी की बात पर लोग टेलीग्राम करने आते थे, हांलाकि कुछ लोग ऐसे भी थे जो उस समय टेलीग्राम से हैप्पी न्यू इयर का संदेश अपने रिश्तेदारों और मित्रों को भेजते थे. फोन और मोबाइल की सुविधा आने के बाद टेलीग्राम भी बंद हो गया़ – अरुण कुमार चौधरी, एसडीओ, बीएसएनएल सह पूर्व टेलीग्राम इंचार्ज 2

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