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Home बिहार मुजफ्फरपुर परख लें, नहीं तो महंगी पड़ सकती है नीलामी में खरीदी गाड़ी

परख लें, नहीं तो महंगी पड़ सकती है नीलामी में खरीदी गाड़ी

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परख लें, नहीं तो महंगी पड़ सकती है नीलामी में खरीदी गाड़ी

रहें सतर्क

-कागजात ठीक नहीं होने से लगाना पड़ेगा परिवहन कार्यालय का चक्कर

-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, गाड़ी की गलत रिपोर्ट से इंट्री कराने में होती दिक्कत-शराब के मामले में जब्त की जाती हैं गाड़ियां, बाद में होती इनकी नीलामी

-गाड़ी व चेचिस नंबर गलत अंकित करने से खरीदार को होती है परेशानी

मुजफ्फरपुर.

शराबबंदी के बाद शराब के साथ जब्त गाड़ियों की उत्पाद विभाग नीलामी करता है. ऐसी गाड़ियों को खरीदने के दौरान अक्सर गाड़ी की गलत रिपोर्ट होने के कारण खरीदार को दोबारा निबंधन कराने में दिक्कत होती है.ऐसे में नीलामी में गाड़ी खरीदने के दौरान बारीकी से कागजात की जांच करने की जरूरत है, ताकि उन्हें नीलामी में खरीदे गयी गाड़ी को दोबारा निबंधन कराने के दौरान परेशानी नहीं हो. उत्पाद विभाग या पुलिस जो भी इस गाड़ी को पकड़ती है तो पहले उसकी एफआइआर दर्ज होती है.उसी दौरान पुलिस रिपोर्ट में गाड़ी का नंबर, चेचिस व इंजन नंबर लिखा जाता है. इसमें की गयी एक दो डिजिट की गलती से खरीदार को परेशानी शुरू हो जाती है.

आये दिन ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जब नीलामी में खरीदी गाड़ी का दोबारा निबंधन कराने के लिए खरीदार जिला परिवहन कार्यालय पहुंचता है. उसे पता चलता है कि गाड़ी के नंबर, चेचिस व इंजन नंबर में गलती है. इसके बाद गाड़ी खरीदने वाले को उसमें सुधार के लिए पुलिस व उत्पाद विभाग के दफ्तर का चक्कर लगाना पड़ता है. इसमें सुधार की प्रक्रिया जटिल होने के कारण खरीदार को परेशानी होती है. इधर, मामले में एमवीआइ राकेश रंजन ने बताया कि गाड़ी जब्त करने वाले पदाधिकारी द्वारा रिपोर्ट दर्ज करायी जाती है. ऐसे में सुधार भी संबंधित पदाधिकारी के स्तर से ही किया जा सकता है.

जब्त वाहन व नीलामी की यह है प्रक्रिया

शराब मामले में उत्पाद विभाग या पुलिस द्वारा वाहन जब्त किया जाता है. इसके बाद जब्त करने वाले उस गाड़ी के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराते हैं. उसके बाद उत्पाद विभाग द्वारा ऐसे जब्त वाहनों की सूची तैयार कर उन गाड़ियों का मूल्यांकन कराने के लिए परिवहन विभाग को पत्र भेजा जाता है. इसके बाद एमवीआइ उक्त वाहनों के मूल्यांकन के लिए संबंधित थानों में जाकर जब्त वाहन की जांच कर उसका एक मूल्य तय कर रिपोर्ट तैयार करते हैं और उसे उत्पाद विभाग को भेजा जाता है. उत्पाद विभाग जिला प्रशासन से अनुमति लेकर नीलामी की प्रक्रिया के तहत उसकी नीलामी के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर उसकी खुली बोली लगाकर नीलाम करवाते हैं. इसके बाद नीलाम वाहन का दोबारा निबंधन नीलामी के कागजात के आधार पर किया जाता है.जिसमें उक्त गाड़ी को नया रजिस्ट्रेशन नंबर जारी होता है.

रिपोर्ट में गाड़ी का नंबर ही गलत, काट रहे चक्कर

साहेबगंज के अभय कुमार ने नीलामी में गाड़ी खरीदी. इसके बाद जब वह उस गाड़ी का निबंधन कराने पहुंचे तो पता चला कि उन्हें दिये गये ब्योरे में गाड़ी के नंबर का डिजिट ही गलत भरा गया है. इसके बाद उन्हें इसके सुधार के लिए कहा गया. उत्पाद विभाग के पास फिर से जाकर सभी कागजात प्रस्तुत कर संशोधन कराने को बोला गया. काफी मशक्कत के बाद उनके कागजात में सुधार हो सका.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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