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कागजों में पूरा, हकीकत में नल-जल का काम अधूरा

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कागजों में पूरा, हकीकत में नल-जल का काम अधूरा

गर्मी बढ़ने के साथ इलाकों में बढ़ा पानी का संकट कहीं बोरिंग फेल, तो कहीं लीकेज से पानी बर्बाद मुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर नल-जल योजना का काम कागजों में पूरा जबकि पंचायतों में अधूरा है. गर्मी बढ़ने के साथ ही कुछ पंचायतों में जहां पानी का संकट उत्पन्न हो गया है, वहीं लीकेज के कारण कुछ स्थानों पर पानी बर्बाद भी हो रहा है. जिले के कई इलाके में जलस्तर नीचे जाने से में जल संकट उत्पन्न हो गया है. इधर, योजना से कराये गये काम की गुणवत्ता की पोल खुलने लगा है. कागज पर काम पूरा हो चुका है. इसका खुलासा जांच रिपोर्ट से हुआ है. आलम यह है कि डीएम के आदेश पर पीएचइडी से संचालित 1913 योजनाओं की जांच करायी गयी. जिसमें 144 योजनाओं में मोटर खराब, 60 की बोरिंग फेल, 700 यूनिट में पाइप लीकेज व 131 में स्टार्टर की समस्या मिली. हालांकि विभाग ने दावा किया कि 17 बोरिंग व 500 से अधिक पाइप लीकेज की समस्या को दुरुस्त कर दिया गया है. वहीं बिजली कनेक्शन और स्टार्टर को भी ठीक कर लिया गया है. इधर, तेजी से बढ़ रहे तापमान को देखते हुए डीएम ने पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता को योजनाओं की गुणवत्ता के अनुरूप काम कराने व जहां परेशानी है, वहां की समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिये हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि टंकी फूट गयी है. नल-जल का पानी मवेशी को धोने व खेतों में पानी पटाने के काम में लाया जाता है. मोतीपुर में 2878 नल-जल योजना में से 2668 योजनाओं की जांच की गयी. इस दौरान 299 योजना में मोटर खराब, 46 में बोरिंग फेल, 920 में पाइप लीकेज, कुल 260 योजना में बिजली कनेक्शन की समस्या व 275 जगहों पर स्टार्टर की समस्या पायी गयी. 288 मोटर, 44 बोरिंग, 748 पाइप लीकेज, 233 बिजली कनेक्शन व स्टार्टर की समस्या को दुरुस्त करा लिया गया है. कुछ वार्डों को छोड़ दिया जाए तो हर जगह योजना की स्थिति खराब है. तीन फीट गहराई में पाइप, पीतल का नल, पाइप, जलमीनार, टंकी और मोटर की क्वालिटी की जांच गहराई से किया जाए तो बड़ा घपला सामने आ सकता है.

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