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Home बिहार मुजफ्फरपुर रामनवमी पर विशेष : आचार संहिता में अटकी जानकी मंदिर की जमीन, चुनाव बाद होगी अधिग्रहण की प्रक्रिया

रामनवमी पर विशेष : आचार संहिता में अटकी जानकी मंदिर की जमीन, चुनाव बाद होगी अधिग्रहण की प्रक्रिया

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रामनवमी पर विशेष : आचार संहिता में अटकी जानकी मंदिर की जमीन, चुनाव बाद होगी अधिग्रहण की प्रक्रिया

अनुज शर्मा, मुजफ्फरपुर अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद उत्तर बिहार के सीतामढ़ी जिले में सीता का भव्य मंदिर बनाने की योजना है. बिहार सरकार ने एक नया मंदिर बनाने के लिए सीतामढ़ी के मौजूदा पुनौरा धाम मंदिर के आसपास 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का सैद्धांतिक रूप से निर्णय लिया था. बिहार कैबिनेट मार्च महीने के दूसरे पखवाड़े में फैसला लिया गया था. इस पर अमल शुरू होता उससे पहले लोकसभा चुनाव को लेकर राज्य में आचार संहिता लग गई. इस कारण इस निर्णय पर अमल शुरू नहीं हो सका. अब जून में आचार संहिता हटने के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. सीतामढ़ी रामायण सर्किट का हिस्सा है और रामायण में वर्णित 15 महत्वपूर्ण स्थानों का एक समूह है. केंद्र और राज्य सरकारें धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखा रही हैं. अयोध्या राम के लिए जिस तरह विकसित की है, उसी तरह सीतामढ़ी माता सीता के लिए विकसित की जाए. लोगों का मानना है कि यह हिंदुओं के लिए एक पवित्र भूमि है. दुनिया भर से लोग अब अयोध्या में राम मंदिर में पूजा करने आएंगे, और वे सीता की जन्मभूमि भी देखना चाहेंगे. इसी सोच को पूरा करने के लिए सीता के लिए उनके कद के अनुरूप एक भव्य मंदिर का निर्माण करने के साथ ही आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जाएगा. याद रहे यह 50 एकड़ जमीन पूर्व में स्वीकृत करीब 16 एकड़ जमीन से अतिरिक्त होगी. सीतामढ़ी के जिला भू अर्जन पदाधिकारी विकास कुमार से जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रभात खबर ने सोमवार को बात की. कुमार का कहना था कि जमीन अधिग्रहण के लिए अभी आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. आदेश मिलते ही तय जमीन अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू कर दी जायेगी. रामायण रिसर्च काउंसिल कराएगी निर्माण रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा सीतामढ़ी में माता सीता की 251 फीट ऊंची प्रतिमा भगवती के रूप में स्थापित की जायेगी. निर्माण आदि कार्य के लिए काउंसिल ने ‘श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति’ का गठन किया है. 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और जल लाने की भी योजना बनाई गई है. नलखेड़ा से मां पीताम्बरा की ज्योति लाई जाएगी. इंडोनेशिया, बाली, श्रीलंका, समेत उन सभी स्थान से जल और मिट्टी लाई जाएगी जहां जहां से सीता-राम का संबंध रहा है. तिरुपति बालाजी जैसी साइट विकसित होगी जानकी मंदिर के लिए 50 एकड़ जमीन का अधिग्रहण की निर्णय के बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने मीडिया से बात की थी. एक अंग्रेजी अखबार को उन्होंने बताया था कि सरकार मंदिर नहीं बना सकती, लेकिन कई ओर से यह मांग उठती रही है कि यहां भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए. सरकार इसे संभव बनाने के लिए भूमि का अधिग्रहण कर रही है. जब मंदिर बनेगा, तो क्षेत्र को बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की सेवा करने की आवश्यकता होगी. होटल और सार्वजनिक सुविधाएं जैसी जरूरतें पूरी करने की आवश्यकता होगी. भूमि अधिग्रहण का निर्णय क्षेत्र में भविष्य के विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. सीएम के प्रधान सचिव का कहना था कि तिरूपति जैसी साइट विकसित हो सके यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध करा रहे हैं. बिहार सरकार ने साल की शुरुआत में 72 करोड़ रुपये मंजूर करते हुए सीतामढ़ी क्षेत्र में एक पुनर्विकास परियोजना को मंजूरी दी थी. बिहार के डीजी विजिलेंस ने राम से की फरियाद बिहार में श्रीराम को लेकर लोक गायन खूब रचा बुना जा रहा है. बड़े- बड़े नौकरशाह भी अपनी ड्यूटी के बाद राम भक्ति में सृजन कर रहे हैं. डीजी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जिम्मेदारी संभाल रहे बिहार कैडर के वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारी आलोक राज ने प्रभु राम भी भगवान राम की भक्ति में तल्लीन हैं. हाल ही में उन्होंने ” मेरे श्री राम आएंगे.. ” गाना गाया है. देश की एक नामचीन म्यूजिक कंपनी इसे प्रस्तुत किया गया है. गायन में रुचि रखने वाले आलोक राज ने इससे पहले भी प्रभु राम पर भजन ”राम से कोई मिला दे.. ” पेश किया किया था. यू ट्यूब पर उनके इन भजनों को पसंद किया जा रहा है. छह साल ही उम्र से राम-जानकी पर विभिन्न विधा में लोकगायन करने वाली पूनम मिश्रा अटल मिथिला सम्मान प्राप्त कर चुकीं हैं. राम- जानकी के कालखंड और भाव वाली उनकी सोहर को सराही जा रही हैं. स्नेहलता की विरासत परंपरा को आगे बढ़ा रहे उनके पौत्र कृष्ण कुमार ठाकुर कन्हैया ने भी राम को लेकर नया गीत बिहार दशरथ नंदन पर पर ” पौना ” गीत राम नवमी 2024 का उत्सव मना देश दुनिया के लोगों को भी शायद यह जानकारी होगी के कि राम – जानकी को लेकर जितना भी जहां भी लोक संगीत वह सुनते हैं उसमें पौना गीत ( राम पर लिखे- गाए गए कुल गीतों का तीन चौथाई भाग) बिहार का है. राम भले ही अयोध्या में जन्मे, लेकिन राम के आगमन का जश्न पर गाया जाने वाला गीत गीत भी बिहार में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ. राम के विवाह गीत या किसी अन्य प्रसंग से जुड़े गीत को सुनने के लिए जब भी गूगल करेंगे बिहार के रचनाकार, गायक- गायिकाओं के गीत सबसे ऊपर होंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां के लोगों ने राम की भक्ति में अपना पूरा जीवन होम कर दिया. गायत्री ठाकुर, भरत शर्मा व्यास, भरत सिंह भारती ने राम पर दुगोला गायन की परंपरा डाली. भोजपुरी में राम दिवायन दास बावला वनवासी राम के वनवास का एक- एक प्रसंग आम आदमी के मर्म से लिखा- गाया. उनकी रचनाओं में इतनी महीन कल्पना है कि राजकुमार राम को पहली बार वन के लोगों ने देखा होगा तो क्या प्रतिक्रिया रही होगी आदि? रामानंद संप्रदाय के सीताराम शरण जी महाराज द्वारा संपादित मैथिल विवाह पदावली , राम के विवाह पर पूरा शोध है.

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