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Home बिहार मुजफ्फरपुर मां कभी मरा नहीं करती, वह भूत, वर्तमान और भविष्य को सहेज कर चलती

मां कभी मरा नहीं करती, वह भूत, वर्तमान और भविष्य को सहेज कर चलती

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मां कभी मरा नहीं करती, वह भूत, वर्तमान और भविष्य को सहेज कर चलती

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

आमगोला स्थित शुभानंदी सभागार में मां प्रतिभा सिन्हा स्मृति पर्व पर एच एल गुप्ता की अध्यक्षता में संवाद और काव्य पाठ प्रस्तुत किया गया. मातृ नमन वंदन आयोजन में प्रतिभा सिन्हा के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गयी. डॉ संजय पंकज ने कहा कि मां प्रकृति की अकूत और असीम शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है. व्यक्ति के भीतर जो कुछ सकारात्मक गुण है वह मातृ पक्ष की प्रबलता है. सृजन, संवेदना, ममता, करुणा, प्रेम की केंद्र मां अपनी संततियों में विस्तार प्राप्त करती है. मां कभी मरा नहीं करती. वह एक साथ भूत, वर्तमान और भविष्य को सहेज कर चलती है. संबंधों के बड़े संसार को जीती हुई मां परंपरा की संवाहिका, संस्कृति की संरक्षिका और सृजनात्मकता की सनातन धारा होती है. एच एल गुप्ता ने कहा कि पुण्यात्मा प्रतिभा सिन्हा के दर्शन और उनसे संवाद का सुख मुझे भी मिला है. उन्हीं के संस्कारों को ग्रहण करते हुए अपने प्रतिभा को सृजनशील और सामाजिक बनाया है. संजीव साहू ने कहा कि आज संजय पंकज की कृतियों से हमारा बिहार गौरवान्वित है और पूरा देश गुंजित हो रहा है. यह मन की ही तो देन है. कुमार राहुल ने कहा कि हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हमारे लालन पालन और शक्ति के विकास में मां की जागृत स्नेहशीलता और शक्ति का योगदान है. कुमार राहुल ने अपनी ग़ज़ल की तरन्नुम में खूबसूरत प्रस्तुति देते हुए जब यह शेर कहा कि – दुनिया की ऐसी रवायत है क्यूं, जिनसे गिला है मोहब्बत है क्यूं – तो सब कि वह वाह-वाहियोंइयों से परिसर गुंजायमान हो गया. गीतकार विजय शंकर मिश्र ने मां तो मां होती है – गीत से वातावरण को मातृ भाव से जोड़ दिया तो संजय पंकज ने अपने गीत – रामचरितमानस पर अंकित अंतिम तेरा छूना, मां आज नहीं हो तुम तो है घर भर का दुख दूना – सुनाकर सबको भावुक कर दिया. कुमार प्रवीण, डॉ अनु, अभिषेक रंजन, अनुराग आनंद ने भी अपनी मां केंद्रित रचनाओं से आयोजन को सार्थक कर दिया. ब्रजभूषण शर्मा, बीके फलक भाई, अविनाश तिरंगा, प्रेमभूषण, विजय कुमार, सुप्रिया, वंदना, अपर्णा आदि के महत्वपूर्ण उपस्थिति रही.

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