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Home बिहार मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर: अल्ट्रासाउंड सुविधा के बिना ‘मॉडल’ अस्पताल, बाहर कट रही मरीजों की जेब

मुजफ्फरपुर: अल्ट्रासाउंड सुविधा के बिना ‘मॉडल’ अस्पताल, बाहर कट रही मरीजों की जेब

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मुजफ्फरपुर: अल्ट्रासाउंड सुविधा के बिना ‘मॉडल’ अस्पताल, बाहर कट रही मरीजों की जेब
मॉडल अस्पताल, मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर का जिस अस्पताल को मॉडल अस्पताल का दर्जा देकर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा किया गया था, वहां आज मरीज एक बुनियादी जांच सुविधा के लिए परेशान हैं. अस्पताल में सामान्य मरीजों के लिए अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण उन्हें निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है.

हर दिन मरीजों की जेब पर पड़ रहा बोझ

अस्पताल की ओपीडी में आने वाले करीब 25 से 30 मरीजों को प्रतिदिन डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच की सलाह देते हैं. लेकिन अस्पताल में मशीन और रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर निजी सेंटरों पर जांच करानी पड़ती है.

एक अल्ट्रासाउंड जांच में मरीजों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. इस हिसाब से रोजाना मरीजों की जेब से लगभग 20 हजार से 25 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं.

अगर मासिक आंकड़े की बात करें तो मरीजों पर यह आर्थिक बोझ करीब 6 लाख से 7.5 लाख रुपये तक पहुंच रहा है.

गर्भवतियों को मिल रही सीमित सुविधा

अस्पताल में केवल एमसीएच विभाग के तहत गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड सुविधा मिल रही है. सामान्य मरीजों के लिए यह सुविधा पूरी तरह अनुपलब्ध है.

मरीजों का कहना है कि वे सस्ते और बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल आते हैं, लेकिन बाहर महंगे अल्ट्रासाउंड की मजबूरी उनकी कमर तोड़ रही है.

अस्पताल प्रबंधन ने भेजा प्रस्ताव

अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि अस्पताल में अलग से अल्ट्रासाउंड सुविधा शुरू करने के लिए मुख्यालय को अवगत कराया गया है. जल्द ही मशीन और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की उम्मीद है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग एक ओर बेहतर सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करता है, जबकि दूसरी ओर मॉडल अस्पताल में बुनियादी जांच सुविधा तक उपलब्ध नहीं है.

लोगों ने मांग की है कि अस्पताल में जल्द अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित कर रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए, ताकि गरीब मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी से राहत मिल सके.

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