[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home बिहार मुजफ्फरपुर हिंदी साहित्य की तमाम विधाओं में चली महेंद्र मधुकर की लेखनी

हिंदी साहित्य की तमाम विधाओं में चली महेंद्र मधुकर की लेखनी

0
हिंदी साहित्य की तमाम विधाओं में चली महेंद्र मधुकर की लेखनी

वरीय साहित्यकार के जन्म दिवस पर उनकी पुस्तक का हुआ लोकार्पण उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर मदर टेरेसा विद्यापीठ, मृणाल कला मंच, कविता स्मृति न्यास, प्रस्तावना विचार गोष्ठी के तत्वावधान में शनिवार को क्लब रोड स्थित मंजुल प्रिया में वरीय साहित्यकार डॉ महेंद्र मधुकर का जन्मोत्सव मनाया गया. जन्मोत्सव पर जुटे साहित्यकारों ने डॉ मधुकर के कृतित्व व्यक्तित्व पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम की शुरुआत सोनी सुमन की सरस्वती वंदना से किया. इसके बाद महेंद्र मधुकर की पुस्तक छाप तिलक सब छीनी का संयुक्त रूप से लोकार्पण किया गया. अध्यक्षीय संबोधन में डॉ पूनम सिंह ने कहा कि डॉ महेंद्र मधुकर के उपन्यासों में आधुनिकता बोध और प्राचीन मान्यताओं का अद्भुत संगम है. भाषा का सौंदर्य भी इनके लेखन को सबसे अलग करता है. मुख्य अतिथि डॉ संजय पंकज ने कहा कि महेंद्र मधुकर ने हिंदी साहित्य की तमाम विधाओं को अपनी रचनाओं में स्थान दिया है. विषय प्रवर्तन करते हुए डॉ विजय शंकर मिश्र ने कहा कि डॉ मधुकरकी वाचन कला और सृजन कला दोनों ही प्रभावित करती है. डॉ चितरंजन कुमार ने कहा कि समाज के अनछुए पहलुओं को महेंद्र मधुकर ने अपने उपन्यासों में बारीकी से पहचाना है और रेखांकित किया है. मौके पर महेंद्र मधुकर ने अपने गीत बूंद बूंद होकर भी ताल में नहीं है, मन बंधा हुआ है पर जाल में नहीं है सुना कर वातावरण को गीतमय कर दिया. आयोजन में सोनाली समदर्शी की काव्य पुस्तक भूमिजा का भी लोकार्पण किया गया. एनबीआइ की चित्रकार काजल मेहता, विनीता कुमारी, कोमल कुमारी ने मधुबनी पेंटिंग व महेंद्र मधुकर के पोट्रेट प्रदान कर अपनी शुभकामनाएं दी. समारोह के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विनोद कुमार सिन्हा, केके चौधरी, उदय नारायण सिंह, विजय शंकर मिश्र, वंदना विजय लक्ष्मी, सोनाली समदर्शी, हरि किशोर प्रसाद सिंह, बीके मल्लिक, प्रेमकुमार वर्मा, पंखुरी सिन्हा, सिबगतुल्लाह हमीदी, रमेश ऋतंभर, लोकनाथ मिश्र, ऋतुराज राज, गोपाल फलक, सविता राज, सोनी सुमन, आरती, मिलन कुमार, मानस, मौली प्रमुख रहे. स्वागत संबोधन समाचार वाचक शुभेंदु अमिताभ, संचालन विजय शंकर मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुनीति मिश्र ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel