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Home बिहार मुजफ्फरपुर 17 वर्षों के बाद घर लौटा मदन मांझी, परिजनों में खुशी

17 वर्षों के बाद घर लौटा मदन मांझी, परिजनों में खुशी

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17 वर्षों के बाद घर लौटा मदन मांझी, परिजनों में खुशी

:: 2004 में केरल से मुजफ्फरपुर आते समय रास्ते में ट्रेन से कूद गया था मदन प्रतिनिधि, कांटी प्रखंड अंतर्गत रामनाथ धमौली पूर्वी पंचायत के कलवारी निवासी मदन मांझी लगभग दो दशक के बाद गुरुवार को बिलासपुर से अपने परिजनों के साथ घर वापस लौटे. मदन मांझी के सकुशल घर वापसी से उसके भाई सजन मांझी, भरत मांझी, भाभी, भतीजा के साथ आसपास के लोग बहुत खुश थे. मदन की सकुशल वापसी में बिलासपुर पुलिस और मेंटल हॉस्पिटल के कर्मी, स्वयंसेवी संस्था घरौंदा के संचालिका अंशु गौड़, डॉ दीप्ति, काउंसलर विजेंद्र कुमार चंदेल व कांटी थानाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह का अहम योगदान रहा. विदित हो कि मदन मांझी 2004 में जीविकोपार्जन के लिए केरल गया था. परंतु केरल में मदन की दिमागी हालत कमजोर होने के कारण परिजन उसको लेने केरल चले गये. परिजन के साथ केरल से वापस आने के दौरान मदन चलती ट्रेन से कूद गया. उसके बाद वापस लाने गये लोग उसको पुनः ढूंढने लगे. परंतु सफलता नहीं मिली. परिजन उसको मृत मान चुके थे. इसी बीच मदन के माता पिता की मृत्यु हो गयी. अचानक पिछले सप्ताह कांटी थानाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने परिजनों को मदन के जिंदा होने की सूचना दी. मदन के भाई सजन मांझी, भरत मांझी, पूर्व मुखिया राजकिशोर सहनी, पड़ोसी दशरथ सहनी व राकेश कुमार चारपहिया वाहन रिजर्व कर मदन के पते पर बिलासपुर पहुंच गये. मदन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित स्वयंसेवी संस्था घरौंदा में रह रहा था. मदन को वापस लाने गए लोगों को घरौंदा के संचालिका अंशु गौड़, डॉ दीप्ति और काउंसलर ब्रिजेंद्र कुमार चंदेल ने बताया कि बिलासपुर पुलिस मदन को 2007 में मानसिक रोगी के रूप में सड़क से उठा इलाज के लिए लाई थी. उस समय मदन कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था. इस कारण से रजिस्टर में मदन को मिलन नाम दिया गया. कई साल के इलाज और काउंसलिंग के बाद धीरे धीरे मदन कुछ कुछ बोलने लगा जिससे उसके द्वारा बताए गए नाम और पते पर छानबीन शुरू की गयी. अंततः सभी लोगों के सालों की मेहनत रंग लायी. मदन अपने परिजन से मिलने में सफल रहा. घरौंदा के सभी लोग सालों से साथ रह रहे मदन के घर जाने पर दुखी हो रहे थे तो दूसरी तरफ मदन के परिजन से मिलने पर खुश भी थे.

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